सीकर रोड पर मानसून सीजन में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए 28 करोड़ की लागत से बने ड्रेनेज प्रोजेक्ट पर पानी फिर गया है। बीते साल फेज-1 का प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इस साल प्री-मानसून में ही 3-3 फीट तक पानी भरा नजर आया। वीकेआई 1 नंबर चौराहे से अंबाबाड़ी तक बने इस प्रोजेक्ट का फायदा इसलिए नहीं मिल रहा, क्योंकि फेज-2 में बनने वाला ड्रेनेज (कैचमेंट एरिया का) प्रोजेक्ट एक साल से कागजों में ही है। इसकी डीपीआर एक साल पहले बनकर जेडीए में सबमिट हो चुकी है और प्री-मानसून में ही फिर से जलभराव से सामना करना पड़ा। ऐसे में मानसून का अंदाजा लगाया जा सकता है। 17 वर्गकिमी कैचमेंट एरिया के लिए 12 किमी ड्रेनेज लाइन जरूरी: सीकर रोड, मुरलीपुरा, वीकेआई, अंबाबाड़ी, ओकेड़ा सहित आसपास के करीब 17 वर्गकिमी कैचमेंट एरिया में बारिश के लिए दो फेज में काम होना था। फेज-1 में वीकेआई 1 नंबर चौराहे से अंबाबाड़ी तक दोनों तरफ 4-4 किमी ड्रेनेज का काम मई 2025 में पूरा हो चुका। फेज-2 में मुरलीपुरा, वीकेआई, अंबाबाड़ी, विद्याधर नगर, ओकेड़ा एरिया 13 वर्गकिमी में 12 किमी ड्रेनेज डालना है। डीपीआर मार्च 2025 से बन चुकी है। इस पर 40 करोड़ खर्च होने हैं और प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ही फेज-1 का फायदा मिलेगा। तब तक सीकर रोड पर जलभराव की समस्या बनी रहेगी। जेडीए दूसरे फेज के लिए आपदा विभाग से मांग रहा फंड जेडीए दूसरे फेज के लिए आपदा प्रबंधन से फंड मांगा है। इसके लिए मार्च में आपदा विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कार्यक्रम के तहत शहरी बाढ़ जोखिम प्रबंधन के लिए 200 करोड़ जयपुर शहर में खर्च करने हैं। पहले फेज में 28 करोड़ जेडीए ने खर्च कर दिए, लेकिन दूसरे फेज के 40 करोड़ आपदा प्रबंधन से डिमांड की जा रही है। आपदा प्रबंधन में तीन महीने से फाइल पेंडिंग है। इधर, सीकर रोड पर तेज बारिश में दो से पांच फीट तक पानी भरने, वाहन बंद होने, कई घंटे तक ट्रैफिक ठप रहने और दुकानों में पानी घुसने जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ढाई किमी में 1.5 मीटर के चौड़े बॉक्स पहले चरण में चौमूं पुलिया से वीकेआई रोड नंबर-1 तक करीब चार किलोमीटर लंबी लाइन डाली गई है। इसमें करीब ढाई किलोमीटर हिस्से में 1.5×1.5 मीटर तथा शेष हिस्से में 2.2 मीटर चौड़े बॉक्स ड्रेन बनाए गए हैं। यह नाला वीकेआई रोड नंबर-1 से शुरू होकर अंबाबाड़ी नाले के जरिए द्रव्यवती तक पानी पहुंचाता है। इसलिए अब भी बनी हुई है समस्या विद्याधर नगर, वीकेआई के अंदरूनी क्षेत्र, रोड नंबर-5, केडिया पैलेस रोड, रोड नंबर-14 और बैनाड़ रोड का बरसाती पानी सड़क पर बहते हुए सीकर रोड तक पहुंचता है। इन इलाकों में पर्याप्त ड्रेनेज नेटवर्क नहीं है। पीडीकोर की तकनीकी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि दोनों ओर बॉक्स ड्रेन बनने के बाद ही समाधान होगा। निर्जला एकादशी ने भी दी सीख; जेडीए अधिकारियों के अनुसार निर्जला एकादशी पर सीकर रोड पर 220 स्थानों पर छबीलें लगी थीं। प्लास्टिक-कागज के गिलास बहकर ड्रेनेज ग्रेटिंग पर जमा हो गए थे, जिससे पानी की निकासी प्रभावित होने लगी। इसके बाद नियमित सफाई व्यवस्था को मजबूत किया गया।