यूआईटी का मामला भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा यूआईटी के पटवारी मानवेंद्र सिंह राठौड़ ने राजस्व गांव काणोली खेड़ा स्थित निजी कॉलोनी के खसरा नंबर 950/66 की भूमि का लेआउट प्लान पास कराने के नाम पर 3 लाख 20 हजार रुपए वसूल किए। इसके बाद महिला परिवादी से 12 लाख 50 हजार रुपए और मांग लिए। पहले जमा कराए गए राशि की रसीद भी नहीं दी। महिला परिवादी ने एसीबी और यूआईटी सचिव को लिखित शिकायत की। प्रथम दृष्टया मामला सही पाए जाने पर तत्काल पटवारी को सस्पेंड कर दिया गया। धारा 16 सीसीए नियमों के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की गई है। परिवादी ने आरोप लगाया कि पटवारी ने उसे अपने कमरे पर बुलाकर 3.20 लाख रुपए लिए और कहा कि इसे यूआईटी में जमा करवाया जाएगा। बाद में देने से मना कर दिया। फिर 12.50 लाख रुपए नहीं देने पर फाइल रोक देने की धमकी दी। इसके बाद महिला ने पूरे घटनाक्रम, रिश्वत के लेन-देन और धमकी को रिकॉर्ड कर लिया। इसे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के एएसपी सहित यूआईटी सचिव को सौंपते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए यूआईटी चेयरमैन एवं कलेक्टर जसमीत सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए पटवारी मानवेंद्र सिंह राठौड़ को निलंबित कर दिया। उसका मुख्यालय कलेक्ट्रेट कार्यालय किया। मानवेंद्र के पास नगर निगम भीलवाड़ा का भी अतिरिक्त चार्ज था। एसीबी की चेतावनी के बाद लौटाए 3 लाख रुपए परिवादी की ओर से एसीबी में शिकायत और रिकॉर्डिंग सौंपने की चेतावनी देने के बाद पटवारी राठौड़ ने 3 लाख रुपए लौटा दिए। पहले केवल 1 लाख रुपए लौटाने की हामी भरी। पूरे पैसे मांगे तो शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक कमरे के बाहर बैठाकर परेशान किया। लगातार तीन दिनों तक परेशान करने के बाद 3 लाख रुपए लौटाए दिए। किसी को भी इस बारे में जानकारी देने पर धमकी भी दी। पटवारी ने एक अन्य व्यक्ति को भी एक बार 20 हजार रुपए दिलवाए थे।