भास्कर संवाददाता | पाली श्रीमाली ब्राह्मण समाज विकास समिति द्वारा तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को कार्यक्रम हुअए। भक्तिमय माहौल में पांच अभिषेक हुए। इसमें सुषमा श्रीमाली, महेश-सुरेखा दवे, भंवरलाल दवे, हरिकृष्ण ओझा एवं हरीश-प्रत्यक्षा परिवार ने आहुतियां दीं। पुजारी आचार्य कृष्ण कांत मिश्रा ने बताया कि लगातार दूसरे वर्ष एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। समाज के 35 आचार्यों ने एक स्वर में शास्त्र सम्मत मंत्रोच्चार के साथ शिव की पूजा-अर्चना की। शाम को महिलाध्यक्ष सुरेंद्र जोशी व वरिष्ठ निर्मलकांता दवे के नेतृत्व में भजन हुआ। महिलाओं ने आसमान से फूलों की बरसात हो रही..." जैसे भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर माहौल को शिवमय कर दिया। समाजध्यक्ष एडवोकेट पीएम जोशी ने बताया कि वैशाख कृष्ण सप्तमी को गुरुवार सुबह 2.30 बजे मणिशिवलिंग को मंदिर प्रांगण में विराजित किया। साल में एक बार होने वाले इन दुर्लभ दर्शनों के दौरान रामेश्वरम से मंगवाए 27 कुंडों के तीर्थ जल से अभिषेक हुआ। मणिशिवलिंग की महिमा बताते हुए जोशी ने कहा कि उत्तर भारत में एकमात्र पाली में ही इसके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है, जो भक्तों को साक्षात ब्रह्मा-विष्णु-महेश और हनुमान जी का आशीर्वाद प्रदान करता है। आज समापन एवं सम्मान समारोह : कार्यक्रम के अंतिम दिन सुबह आम्लेश्वर महादेव और सांवलिया सेठ का विशेष अभिषेक किया। 11 तरह के पुष्पों से फूलमंडली सजाई और सुबह 11.39 बजे ध्वजारोहण हुआ। संयोजक रविशंकर दवे के अनुसार, शाम 4 बजे अवतार पुरी महाराज और प्रशासनिक व न्यायिक अधिकारियों के आतिथ्य में समारोह होगा। इसमें भामाशाहों और आचार्यों का बहुमान होगा। रात्रि 7.30 बजे 3 दिवसीय महोत्सव पूरा होगा।