भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा आईपीएस माधव उपाध्याय व जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा के खास अजय पांचाल पर गारनेट के अवैध कारोबार को लेकर वसूली के आरोप लगे। आखिर गारनेट के धंधे में ऐसा है क्या? दैनिक भास्कर की इन्वेस्टीगेशन में सामने आया कि जिले में गारनेट की पांच लीज है। इसमें भी दो बंद है। ये लोग अपनी खदानों से फर्जी रवन्ना काट रहे हैं। जहाजपुर तहसील के ग्राम ओडिया खेड़ा स्थित खनन क्षेत्र में दिनेश कुमार जैन के नाम से जारी खनन पट्टा संख्या 150/2006 में रिकॉर्ड और वास्तविक खनन में भारी अंतर पाया गया। विभाग के अनुसार 06 अप्रैल को निरीक्षण में खनन और निर्गमन (डिस्पैच) के रिकॉर्ड का मिलान किया। जांच में सामने आया कि पट्टाधारक द्वारा 18 फरवरी 2023 से 31 मार्च 2026 के बीच कुल 1963 रवन्ना जारी किए, जिनसे 42289.6 टन खनिज (गार्नेट) का निर्गमन दिखाया। वास्तविक खनन केवल 3588.89 टन ही पाया। इस प्रकार रिकॉर्ड में 38700.71 टन खनिज अधिक दर्शाया गया, जो गंभीर अनियमितता है।इसमें लीजधारक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जिले में वर्ष 2025-26 में 60973 टन माल डिस्पैच किया। जिले में लोग दूसरी जगहों के रवन्ना लगाकर अवैध माल को वैध बता रहे हैं। इसी खेल के कारण कई लोग इस गारनेट के कारोबार में घुस गए क्योंकि इसमें कमाई ज्यादा है। लाल रंग का गारनेट मिनरल महंगा है, क्योंकि विदेशों में भी जा रहा है। इस अवैध काम को बढ़ाने के लिए ही ये पुलिस, खान विभाग व अन्य लोगों के साथ पूरा सिंडिकेट बना रहे हैं। कोटड़ी क्षेत्र के इन गांवों में कई लोगों ने सेपरेटर लगा रखे हैं। इनमें बजरी को डालकर इसे छानते हैं। मेग्नेट व अन्य पदार्थ होने से लाल रेत अलग हो जाती है। इसे पानी में धोने के बाद सुखाया जाता है। इसके बाद इसे डंपर-ट्रैक्टरों में भरकर बेचते हैं। अभी जो गारनेट बिकता है उसका शुरुआती भाव छह हजार रुपए प्रतिटन है। साफ होने के बाद इसे 14 से 16 हजार रुपए टन में बेचा जाता है। साउथ में पत्थर पीसकर निकालते है, यहां बनास में गुणवत्ता का लाल गारनेट