960 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले की जांच पूर्व कांग्रेस सरकार के सीएमओ तक पहुंच सकती है। रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल सहित अन्य इंजीनियरों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद एसीबी को इससे जुड़ी अहम जानकारियां मिली हैं। जेजेएम के 20 हजार करोड़ के टेंडरों में प्राइस वेरिएशन की शर्त हटाने और साइट विजिट की शर्त जोड़ने, चीफ इंजीनियर को सस्पेंड करने और फर्जी प्रमाण पत्र से टेंडर लेने की जानकारी तत्कालीन सीएमओ में तैनात अफसरों को होने के बाद भी बड़ी कार्रवाई नहीं की गई थी। इसके अलावा टेंडरों में पूलिंग के लिए उच्च दरों का रेट जस्टिफिकेशन उन्हीं के आसपास बनवाया गया। जेजेएम घोटाले की तह तक पहुंचने के लिए उच्च स्तर तक जांच करने को लेकर एसीबी ने संकेत दिए हैं। सुबोध 13 तक रिमांड पर, 5 एडि. एसपी 125 साल पूछेंगे इधर, रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल को कोर्ट ने 13 अप्रैल तक रिमांड पर भेज दिया। एसीबी ने पूछताछ के लिए 125 सवाल तैयार किए हैं। 5 एडिशनल एसपी के नेतृत्व में टीमें बनाई गई हैं। अग्रवाल से राजनीतिक, ब्यूरोक्रेसी और विभाग के कई इंजीनियरों की भूमिका के संबंध में भी सवाल पूछे जाएंगे। साथ ही जेजेएम प्राइस वेरिएशन की शर्त हटाने और साइट विजिट की शर्त जोड़ने के 20 हजार करोड़ के टेंडरों को लेकर भी सवाल-जवाब शामिल हैं। क्योंकि पूर्व में गिरफ्तार किए अफसरों में पूछताछ में सामने आया था कि सुबोध अग्रवाल फर्जीवाड़ा करने के लिए अफसरों पर दबाव बनाते थे। घोटाले में प्रदेश के 50 अधिकारी, नेता और पीएचईडी इंजीनियरों की भूमिका संदिग्ध मान रही है। सुबोध अग्रवाल से पूछताछ में ओर भी अधिकारियों की भूमिका आने की संभावना है। ऐसे में एसीबी ने मामले की जांच और मॉनिटरिंग के लिए 2 डीआईजी को लगाया है। इससे पहले इस मामले में एसपी के नेतृत्व में एसआईटी बनाई थी। एसीबी ने रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल सहित फरार चल रहे चार आरोपियों की अवैध संपत्तियों की सूची भी तैयार कर ली। एसीबी ने अवैध संपत्तियों की सूची कोर्ट में पेश कर दी। जिसके आधार पर कोर्ट ने इनके खिलाफ स्थाई वारंट जारी करते हुए भगोड़ा घोषित किया था। अभी एसई जितेन्द्र शर्मा, मुकेश गोयल व प्राइवेट व्यक्ति संजीव गुप्ता फरार चल रहे है। उनकी संपत्तियां कुर्क कराने की तैयारी की जा रही है। जेजेएम घोटला के संबंध में वर्ष 2024 में हुई एफआईआर में रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल सहित 11 गिरफ्तार हो गए। इस एफआईआर में एसीबी 8 टैंडर (एनआईटी) की जांच कर रही है। इस घोटाले में शामिल फर्मों ने इरकॉन कंपनी के 4 फर्जी सर्टिफिकेट बनवाएं थे। इसकी शिकायत मिलने के बाद भी सुबोध अग्रवाल ने फर्मों पर एक्शन नही लिया तो इरकॉन की विजलेंस शाखा ने विभागीय जांच की और इसकी रिपोर्ट बनाकर सीबीआई को भेजी थी। जिसके आधार पर सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच की तो फर्जी सर्टिफिकेट के साथ-साथ विशाल सक्सेना की भूमिका भी ​मानी थी।”