प्रदेश में उच्च शिक्षा का एडमिशन से लेकर परीक्षा का शेड्यूल बेपटरी हो गया है। न उच्च शिक्षा विभाग के नियमों की पालना हो रही है, ना ही लोकभवन के एकेडमिक कैलेंडर की। प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में ही पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज में नवंबर तक एडमिशन होंगे। प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं दिसंबर में शुरू हो जानी चाहिए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एडमिशन ही नवंबर में होंगे तो 6 माह की पढ़ाई और प्रथम सेमेस्टर परीक्षा दिसंबर में कैसे होगी। कॉलेज आयुक्तालय 3 बार आवेदन की तारीख बढ़ा चुका है। अब 12 नवंबर तक आवेदन होंगे। 90 दिन रेगुलर क्लास का नियम:6 महीने का सेमेस्टर 30 दिन में कैसे पढ़ें छात्र? सरकारी नियम मानें तो पीजी में छात्र को एडमिशन होने की तिथि से कम से कम 90 दिन क्लास लेनी होगी। इसके बाद ही वह सेमेस्टर परीक्षा में बैठने के लिए योग्य होगा। वहीं, 75 प्रतिशत उपस्थिति भी अनिवार्य है। ऐसे में नवंबर अंत में एडमिशन लेने वाले छात्रों की परीक्षा मार्च तक आयोजित होगी। लोकभवन का एकेडमिक कैलेंडर भी बेअसर; लोकभवन से अप्रूव्ड उच्च शिक्षा के एकेडमिक कैलेंडर के अनुसार 29 जून तक एडमिशन होने थे। लेटलतीफी से प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में हर साल यूजी और पीजी में सीटें खाली रहती हैं। आवेदन 22 सितंबर से शुरू हुए। प्रदेश के 217 सरकारी कॉलेजों में पीजी कोर्स संचालित हैं। वर्ष 2024 में 42,300 सीटों पर 28 हजार और 2025 में 44,400 सीटों पर 30 हजार एडमिशन हुए थे। इस बार 46 हजार सीटों के लिए करीब 58 हजार आवेदन आए हैं। विश्वविद्यालयों के लेट रिजल्ट से बिगड़ा शेड्यूल; प्रदेश में अलग-अलग विश्वविद्यालय कॉलेजों की परीक्षा करवाते है। राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर और दौसा के कॉलेजों के छात्रों की परीक्षा करवाती है। नई शिक्षा नीति के तहत यूजी और पीजी में सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के बाद विश्वविद्यालय समय पर परीक्षाएं और परिणाम जारी नहीं कर पा रहे हैं। एमडीएस यूनिवर्सिटी, भरतपुर सहित कई विवि​ के यूजी रिजल्ट देरी से आने से पीजी में एडमिशन की तारीख बढ़ानी पड़ी। एमडीएस यूनिवर्सिटी में यूजी का रिजल्ट नहीं आया। ऐसे ही भरतपुर समेत कई विवि का रिजल्ट भी लेट हुआ। इस वजह से पीजी में एडमिशन की डेट बढ़ाई गई। -नथमल डिडेल, आयुक्त, कॉलेज शिक्षा विभाग