शहर के देवली रोड स्थित ग्राम सेवारामपुरा में प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी का सपना 15 साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सका। यदि ये आवासीय कॉलोनी समय रहते वजूद में आ जाती, तो ये क्षेत्र के विकास में काफी उपयोगी हो सकती थी। लेकिन इसकी देरी ने किसानों के साथ ही कई लोगों को आहत किया। साथ ही यहां पर आवासीय कॉलोनी बनने की संभावनाओं ने आसपास जमीन के भाव भी बढ़ा दिए। बहरहाल जिस योजना से लोगों को नए आवास, किसानों को बेहतर मुआवजा और क्षेत्र के विकास की उम्मीद थी, वह अब तक फाइलों में ही अटकी रही। न कॉलोनी विकसित हुई, न किसानों को मुआवजा मिला और न ही आवासन मंडल ने भूमि का कब्जा लिया। अब राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भूमि को अवाप्ति से मुक्त किए जाने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता दिनेश चौरासिया ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर खंडपीठ के न्यायाधीश आनंद शर्मा की एकल पीठ ने ग्राम सेवारामपुरा की भूमि को अवाप्ति से मुक्त करने के आदेश पारित किए। उन्होंने मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता के हवाले से बताया कि राजस्थान आवासन मंडल ने वर्ष 2011 में करीब 600 बीघा भूमि आवासीय योजना के लिए अधिग्रहित की थी तथा 1 मार्च 2017 को अवार्ड जारी किया गया। लेकिन भूमि अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना में उचित प्रतिकर अधिनियम-2013 के तहत निर्धारित अवधि में न तो किसानों को मुआवजा दिया गया और न ही भूमि का कब्जा लिया गया। इसी आधार पर न्यायालय ने अधिग्रहण को निरस्त करने के आदेश दिए। अब आगे सरकार अपील में जाएंगी, या आदेश की पालना के तहत कार्य अमल में लाएगी। ये तो समय ही बताएगा। लेकिन फिलहाल अधिकारी इस संबंध में कुछ स्पष्ट करने की स्थिति में नहीं है। लेकिन न्यायालय के आदेश से किसान खुश नजर आए। उल्लेखनीय है कि टोंक तहसील के देवली रोड पर स्थित ग्राम सेवारामपुरा में कुल रकबा 599 बीघा 11 बिस्वा भूमि को आवासीय प्रायोजना के लिए राज्य सरकार द्वारा 12 अक्टूबर 2011 एवं धारा 6 की अधिसूचना 15 अप्रैल 2013 को की गई थी। इस भूमि को उपखंड अधिकारी, तहसीलदार से प्राप्त रिपोर्ट एवं किसानों की महापंचायत के प्रस्तुत ज्ञापन आदि के आधार पर अतिरिक्त कलेक्टर ने भी इस अवाप्त भूमि को मुक्त किए जाने के लिए 15 अप्रैल 2022 को आवासन मंडल आयुक्त को पत्र भेजा बताया जाता है। लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आ पाई है। ये हो रही थी परेशानी महावीर का कहना है कि यहां के पट्टे नहीं बन रहे थे। किसान बीच में अटके हुए थे। नगर परिषद के अधिकारी कहते हैं कि हाउसिंग बोर्ड कहेगा जब ही पट्टा बनेगा। इरफान,गनी सहित कई का कहना था कि वो इस क्षेत्र में 2007 से पट्टे की कार्रवाई कर रहे हैं। किसान लंबे समय से भूमि को मुक्त किया जाने पर जोर देते रहे। ये भूमि सिंचित है। इससे किसानों की रोज़ी रोटी जुड़ी हुई है। लेकिन लंबे समय से इसे अटका रखा है।