जिले में भीषण गर्मी के बीच लगातार बढ़ते बिजली लोड, ट्रिपिंग व वॉल्टेज की समस्या से जूझ रहे शहरवासियों के लिए राहत की खबर है। शहर में बिजली तंत्र को मजबूत करने के लिए दो नए 33/11 केवी ग्रिड सब स्टेशन स्वीकृत किए गए हैं। इनमें एक जीएसएस पचपदरा बाइपास रोड और दूसरा चतुर्थ चरण क्षेत्र में बनेगा। दोनों जीएसएस के निर्माण से शहर के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में बिजली का लोड बंटेगा। वहीं उपभोक्ताओं को कम वोल्टेज, ट्रिपिंग व बार-बार होने वाले फाल्ट की समस्या से राहत मिलेगी। एईएन द्वितीय क्षेत्र में पचपदरा बाइपास रोड व चौथे फेज में दोनों 33/11 केवी सब स्टेशन स्वीकृत किए गए हैं। अब इनकी टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। पचपदरा रोड क्षेत्र में वार्ड संख्या 43, 44 व 45 के साथ नए बस स्टैंड व आस-पास के क्षेत्रों में सालों से वॉल्टेज की समस्या बनी हुई है। शहर के विस्तार व नए आवासीय क्षेत्रों के विकसित होने के कारण मौजूदा बिजली तंत्र पर लगातार लोड बढ़ रहा है। गर्मी के चलते शहर सहित क्षेत्र में बिजली सप्लाई सिस्टम पर दबाव बढ़ा दिया है। अप्रैल माह से तापमान लगातार 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक रहने से कूलर, एसी सहित अन्य बिजली चालित उपकरणों का उपयोग बढ़ा है। बालोतरा शहर में सामान्य दिनों की तुलना में गर्मी में बिजली की खपत प्रतिदिन करीब 4 लाख यूनिट अधिक रहती है। इससे शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर प्रतिदिन करीब 36 लाख यूनिट बिजली की खपत हो रही है। अधिक लोड का असर बिजली तंत्र पर भी पड़ रहा है। जिले में प्रतिदिन बिजली फॉल्ट व ट्रिपिंग की दर्जनों शिकायतें हर रोज सामने आ रही हैं। वहीं औसतन 10 से 15 ट्रांसफार्मर जलने की शिकायतें भी मिल रही हैं, जो सामान्य दिनों की तुलना में करीब दोगुनी हैं। ऐसे में नए जीएसएस बनने से मौजूदा सब स्टेशनों व ट्रांसफार्मर पर दबाव कम होने के साथ बिजली वितरण व्यवस्था बेहतर होगी। वर्तमान में 7 जीएसएस से सप्लाई हो रही है, एक बनकर तैयार हो गया है और अब दो जीएसएस और बनेंगे तो शहर के कई इलाकों की लो वॉल्टेज की समस्या का समाधान हो जाएगा। शहर के लगातार विस्तार के साथ बिजली की मांग भी बढ़ रही है। पचपदरा बाइपास रोड, नए बस स्टैंड व चौथे फेज जैसे क्षेत्रों में आबादी तथा व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से नए बिजली ढांचे की जरूरत महसूस की जा रही थी। दो नए 33/11 केवी जीएसएस बनने से बिजली का लोड अलग-अलग फीडरों में बांटा जा सकेगा। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज मिलने के साथ फॉल्ट व ट्रिपिंग की समस्या में कमी आने की उम्मीद है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों जीएसएस का निर्माण शुरू होगा। शहर की बढ़ती आबादी व क्षेत्र के विस्तार के साथ ही बिजली की मांग भी बढ़ी है। इसे लेकर लंबे समय से नए बिजली ढांचे की जरूरत महसूस की जा रही थी। शहर में दो नए 33/11 केवी जीएसएस बनने से बिजली का लोड अलग-अलग फीडरों में बांटा जा सकेगा। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज मिलने के साथ फॉल्ट व ट्रिपिंग की समस्या से निजात मिलेगी। - डॉ. अरूण चौधरी, विधायक, पचपदरा