दुनियाभर के 41 देशों से तेल आयात कर सस्ती दर पर रिफाइन करने में भारत सुपर पावर बन गया है। भारत में क्रूड रिफाइन करने की लागत 2 से 4 रुपए प्रति लीटर है, जबकि अन्य देशों में 5 रुपए तक है। दुनिया के एनर्जी सेक्टर के लिए रिफाइनरी टर्निंग पॉइंट होगी। रूस-यूक्रेन और हाल में ईरान युद्ध के बाद यहां तेल रिफाइन करने की क्षमता और बढ़ी है। क्रूड ऑयल को रिफाइन करने की सालाना क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन है। इनमें से 1.5 मिलियन टन तेल केयर्न वेदांता के मंगला टर्मिनल से आएगा और 7.5 मिलियन मीट्रिक टन आयात होगा, जिसे मुंद्रा पोर्ट से पाइपलाइन से लाया जाएगा। इसमें रूस के साथ खाड़ी देशों से आयात होने वाले तेल की मात्रा शामिल है। इससे राजस्थान सरकार को सालाना 5 हजार करोड़ रुपए की आय होगी। रिफाइंड तेल विश्व भर में बेचने में भारत ने सऊदी अरब को पीछे छोड़कर नंबर वन बन गया है। आने वाले सालों में इस रिफाइनरी के कारण तेल निर्यात में राजस्थान का अहम रोल साबित होगा। यह देश की 23 मौजूदा रिफाइनरी में से जामनगर की रिलायंस रिफाइनरी की तरह सबसे एडवांस है। साथ ही मुंद्रा पोर्ट से सीधे कनेक्ट होने के कारण जामनगर की तरह यहां तेल की ज्यादा मात्रा आएगी। रूस से आयात होने वाले तेल का ज्यादातर हिस्सा यहीं पर रिफाइन होगा और यूरोप जैसे मार्केट में सप्लाई किया जाएगा। भारत से निर्यात बढ़ेगा, अभी 106 देश दुनिया में कच्चा तेल रिफाइन करने की सबसे ज्यादा क्षमता भारत के पास है। इसके चलते ही भारत दुनिया को सबसे ज्यादा रिफाइंड तेल निर्यात करने वाला देश है। अभी 88% कच्चा तेल आयात हो रहा है और यहां से निर्यात का आंकड़ा ज्यादा है। भारत अभी 106 देशों को तेल निर्यात कर रहा है। इस रिफाइनरी की बदौलत यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। भारत की रिफाइनिंग कंपनियां घरेलू मांग से अधिक तेल रिफाइन करती हैं। राजस्थान रिफाइनरी शुरू होने के बाद यहां अवसर ज्यादा बढ़ेंगे। बाहर से आयात होने के साथ यहां स्थानीय तेल के भंडार मिलने की संभावना है। ऐसे में इस रिफाइनरी की भविष्य में क्षमता बढ़ाई जा सकती है। रिफाइनरी से जुड़ी तीन पाइपलाइन :