किसी के हाथों में कटोरा था, कोई कचरा बीन रहा था, लेकिन अब उन्हीं हाथों में कॉपी-किताब हैं। भीलवाड़ा में एक युवक ने ऐसे बच्चों की जिंदगी बदलने का बीड़ा उठाया है, जिन्हें समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है। शहर में रजिस्ट्रार ऑफिस के पास एक टीनशेड के नीचे ‘घुमंतू पाठशाला शिक्षण संस्थान’ चलाने वाले रतन नाथ कालबेलिया पिछले ढाई साल से कचरा बीनने और भीख मांगने वाले बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं। उन्होंने यह पहल सिर्फ पांच बच्चों से शुरू की थी, जो अब बढ़कर 45 बच्चों तक पहुंच गई है। पाठशाला सुबह 8 से 12 बजे तक संचालित होती है। रतन नाथ बताते हैं कि इन बच्चों के माता-पिता खुद कभी स्कूल नहीं गए, इसलिए वे बच्चों को भी कमाई के लिए लगा देते हैं। कई बार जब ये बच्चे भीख मांगते या कचरा बीनते हैं तो उन पर चोरी जैसे झूठे आरोप लगा दिए जाते हैं। ऐसे बच्चों को छुड़ाकर लाना और पढ़ाई से जोड़ना ही उनकी दिनचर्या बन गई है। रतन नाथ खुद बच्चों को पढ़ाते हैं। साथ ही चार हजार रुपए महीने में एक शिक्षिका भी लगा रखी है। पढ़ाई के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता। वे मकान निर्माण का ठेका लेकर परिवार चलाते हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी कमाई का हिस्सा इन बच्चों पर खर्च कर देते हैं। इस काम में भामाशाहों और समाजसेवी संगठनों का भी सहयोग मिलता है। खुद 9वीं तक पढ़े रतन नाथ अब पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण छूटी पढ़ाई को आगे बढ़ाते हुए ओपन से 10वीं की परीक्षा दे रहे हैं। रतन नाथ का परिवार मकान चुनाई का काम करता है। रतन खुद मकान निर्माण का ठेका लेते हैं। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के बाद जो कुछ बचता है, वे इन बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर देते हैं।