विश्व स्पाइन दिवस के अवसर पर बीकानेर और संभाग भर के मरीजों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में रीढ़ की हड्डी की गंभीर बीमारियों और चोटों के आधुनिक इलाज के लिए 30 बेड का अलग स्पाइन इंजरी सेंटर तैयार किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को करीब 4 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। पहले इस सेंटर को एफ वार्ड में डेवलप किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन मरीजों की सहूलियत, आधुनिक उपकरणों की स्थापना और बेहतर देखभाल को ध्यान में रखते हुए अब इसके लिए अलग से समर्पित सेंटर बनाने की कवायद की जा रही है। पीबीएम अस्पताल का न्यूरोसर्जरी विभाग बीकानेर और आसपास के विशाल क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के अंतर्गत स्पाइन सेंटर को लगातार आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। वर्तमान में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में एक समर्पित ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह चालू है, जहां रीढ़ की हड्डी की जटिल से जटिल सर्जरी सुचारू रूप से की जा रही हैं। इसके अलावा मरीजों को सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में सप्ताह में चार दिन स्पाइन ओपीडी की सुविधा भी दी जा रही है। पिछले साल का आंकड़ा: 300 मरीज भर्ती, 172 के सफल ऑपरेशन आंकड़ों पर नजर डालें तो गत वर्ष पीबीएम अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में रीढ़ की हड्डी की विभिन्न समस्याओं और गंभीर चोटों से ग्रसित लगभग 300 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। इनमें से 172 गंभीर मरीजों का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया, जबकि शेष मरीजों को फिजियोथेरेपी और दवाइयों के माध्यम से बिना ऑपरेशन के ही पूरी तरह स्वस्थ किया गया। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि संभाग में स्पाइन इंजरी के मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार कितना जरूरी है। वृद्धावस्था में कैसे बचें ऑस्टियोपोरोसिस से? वृद्धावस्था में पुरुषों और महिलाओं दोनों में ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का खोखलापन) बढ़ता है। महिलाओं में समस्या ज्यादा होती है। इस स्थिति में रीढ़ की हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि मामूली गिरने या हल्का सा झटका लगने पर भी गंभीर फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के लिए अपने शरीर में विटामिन D3 का लेवल सही बनाए रखें। यह हड्डियों को मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्व है। अपने दैनिक भोजन में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और तिल जैसी कैल्शियम से भरपूर चीजों को शामिल करें। रोजाना हल्की वॉक, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में सुरक्षित व्यायाम करें। -डाॅ. मोहित िबहाणी, अाॅर्थाेपेडिक एवं स्पाइन सर्जन रीढ़ की हड्डी शरीर का मुख्य आधार है। गलत पोश्चर, दिनभर स्क्रीन के सामने झुककर बैठना और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण अब युवाओं में भी सर्वाइकल और स्लिप डिस्क की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पीबीएम अस्पताल में 30 बेड का अलग स्पाइन इंजरी सेंटर बनने से मरीजों को एक ही छत के नीचे विश्वस्तरीय और आधुनिक इलाज मिल सकेगा। किसी भी प्रकार के दर्द, सुन्नपन या चोट को नजरअंदाज न करें, समय पर इलाज ही स्थायी दिव्यांगता से बचा सकता है। -डॉ. कपिल पारीक, ब्रेन एवं स्पाइन सर्जन, प्रोफेसर (न्यूरोसर्जरी विभाग) एवं नोडल अधिकारी (स्पाइन इंजरी सेंटर), पीबीएम अस्पताल प्राथमिक उपचार और बचाव के अहम नियम सड़क हादसे के बाद सावधानी: दुर्घटना के बाद यदि रीढ़ की हड्डी में चोट की आशंका हो, तो मरीज को बिल्कुल भी हिलाएं-डुलाएं नहीं। मरीज की गर्दन और पीठ को सीधा रखते हुए तुरंत स्ट्रेचर या हार्ड बोर्ड की मदद से अस्पताल पहुंचाएं।
वजन उठाने का सही तरीका: जमीन से भारी सामान उठाते समय कमर से झुकने के बजाय घुटनों को मोड़कर नीचे बैठें और फिर वजन उठाएं।
सक्रिय जीवनशैली: नियमित व्यायाम, योग, सही पोश्चर और वाहन चलाते समय सीट बेल्ट व हेलमेट का प्रयोग रीढ़ को सुरक्षित रखता है।