नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने गुरुवार देर रात NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया। इसमे पाली के कई युवाओं ने अपनी मेहनत और लगन से सलेक्शन ​लिया और नाम रोशन किया। लेकिन, जिले के बूटेलाव गांव निवासी आदित्य वैष्णव की संघर्ष की कहानी कुछ हटकर है। एक हादसे में आदित्य की रीड की हड्डी क्रेक हो गई। ऑपरेशन हुआ लेकिन अभी भी वह व्हील चेयर पर ही है। ऐसी विपरित परिस्थियों में भी उसने हार नहीं मानी और पढ़ाई जारी रखी। परिणाम यह रहा कि नीट परीक्षा में उसका सलेक्शन हुआ। आइए जानते है आदित्य की संघर्ष की कहानी… पाली जिले के सोजत तहसील क्षेत्र के गांव बूटेलाव में जनरल स्टोर चलाने वाले जितेन्द्र वैष्णव बताते है कि उनके एक बेटा आदित्य वैष्णव और एक बेटी जिज्ञासा है। पत्नी सुमित्रा हाऊस वाइफ है। बेटा आदित्य शुरू से ही पढ़ाई में होशियार था और डॉक्टर बनने का सपना देखता था। सोजत में 12वीं तक की पढ़ाई की। छत से गिरने से रीड की हड्डी टूटी 12वीं पास करने के बाद आदित्य जोधपुर बासनी स्थित अपने ननिहाल चला गया। वहां उसे कुछ ही महीने हुए थे। 11 दिसम्बर 2024 को आदित्य दो मंजिला मकान की छत पर टहल रहा था। इस दौरान उसका पैर फिसल गया। जिससे वो नीचे गिर गया। इस हादसे ने उसकी पूरी जिंदगी बदल दी। उसकी रीड की हड्‌डी और पैर की हड्‌डियां क्रेक हो गई। हालत गंभीर थी। तुरंत जोधपुर एम्स हॉस्पिटल ले गए। जहां 14 दिसम्बर 2024 को जोधपुर एम्स हॉस्पिटल में उनका ऑपरेशन हुआ। इसके बावजूद भी उसका कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं कर रहा है। मेडिकल भाषा में उसे स्पाइनल कॉर्ड इंजरी कहते है। 10 महीने तक डॉक्टरों की देख रेख में रहा ऑपरेशन के बाद करीब 10 महीने तक आदित्य डॉक्टरों की देखरेख में रहा और फिजियोथेरेपी भी लेता रहा। वर्तमान में भी उसका इलाज जारी है। स्थिति यह है कि वह अब खुद के पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता है। उस हादसे ने जिंदगी भर का गम दिया है जो आज तक भी नहीं भर पाया। हार नहीं मानी और पढ़ाई जारी रखी इतना सब कुछ होने के बाद भी आदित्य ने हार नहीं मानी और न ही हौसला खोया। न ही डॉक्टर बनने का अपना सपना टूटने नहीं दिया। दिव्यांग हो जाने के बाद भी डिप्रेशन को उसने अपने ऊपर हावाी नहीं होने दिया और पढ़ाई लगातार जारी रखी। जब नीट का एग्जाम आया तो परिजन उसे कार में सुलाकर परीक्षा केंद्र ले जाते थे और वापस लाते थे। आखिर आदित्य की मेहनत रंग लाई और उसने नीट परीक्षा में ऑल इंडिया में 9483 रैंक हासिल की। उसकी इस सफलता ने पूरे परिवार की आंखों में खुशी का आंसू ला दिए।