जयपुर-अजमेर एक्सप्रेस-वे पर दो दिन में 5 मौतों के बाद प्रशासन सड़क सुरक्षा की खामियां तलाशने में जुटा है। कलेक्टर ने पांच विभागों की संयुक्त टीम बनाकर हादसों के कारणों और सुधार के सुझावों पर पांच दिन में रिपोर्ट मांगी है। इस बीच भास्कर ने गुरुवार को पीडब्ल्यूडी के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर और रोड इंजीनियरिंग एक्सपर्ट सीताराम शर्मा के साथ 200 फीट चौराहे से कमला नेहरू पुलिया तक करीब डेढ़ किमी हिस्से का पैरेलल निरीक्षण किया। पड़ताल में सामने आया कि जिस हिस्से पर रोज हजारों वाहन गुजरते हैं, वहां बुनियादी सड़क सुरक्षा इंतजाम तक अधूरे हैं। न स्पीड लिमिट के बोर्ड हैं, न ट्रैफिक मर्ज के संकेत। कई जगह सर्विस रोड और मुख्य सड़क के बीच गैप इतना चौड़ा है कि वाहन अचानक हाई-स्पीड ट्रैफिक के सामने आ जाते हैं। बस संचालकों ने सड़क किनारे अवैध स्टॉपेज बना लिया है, जहां सवारियां उतारी-बैठाई जा रही हैं। भास्कर ने रोड इंजीनियरिंग एक्सपर्ट के साथ किया घटनास्थल का निरीक्षण, 200 फीट चौराहे से कमला नेहरू पुलिया तक मिली ये 5 बड़ी तकनीकी खामियां 1. जंक्शन पर अचानक सामने आ रहे वाहन 200 फीट चौराहे और एक्सप्रेस-वे के जंक्शन पर दोनों सड़कों का ट्रैफिक मिल रहा है। यहां ट्रैफिक मर्ज का साइन बोर्ड और ब्लिंकर नहीं। वाहनों के लिए सड़क का मार्जिन काफी चौड़ा है। 2. डेढ़ किमी क्षेत्र में वाहन स्पीड के साइन बोर्ड ही नहीं डेढ़ किमी लंबे पूरे हिस्से में कहीं भी वाहनों की स्पीड लिमिट का बोर्ड नहीं है, जबकि यह घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां एक्सप्रेस-वे से उतरने के बाद वाहनों की गति कम कराना आवश्यक है। 3. होटल अमारा के सामने गैप ज्यादा, हादसे हो रहे होटल अमारा पैलेस और हाईवे किंग के सामने सर्विस रोड और मुख्य सड़क के बीच अत्यधिक चौड़ा गैप भी हादसों की वजह बन रहा है। 4. बीच रास्ते में ही बसें रुक रही, सवा​री बैठा रहे क्षेत्र में दुर्घटना संभावित क्षेत्र, नो-पार्किंग और नो-स्टॉपेज चेतावनी बोर्ड नहीं हैं। बस संचालकों ने अवैध स्टॉपेज बना लिया है। सड़क किनारे सवारियां बैठाई और उतारी जा रही हैं। 5. कट नहीं, फिर भी साइन बोर्ड, यूटर्न निषेध एक्सप्रेस-वे पुलिया से उतरते ही कट का साइन बोर्ड लगा है, जबकि पुलिया से कमला नेहरू पुलिया तक कोई कट नहीं है। ऐसे में बोर्ड वाहन चालकों को भ्रमित करता है। यहीं यू-टर्न निषेध का बोर्ड भी है, लेकिन हर मिनट वाहन टर्न ले रहे। }