जोधपुर एम्स के दीक्षांत समारोह में एक स्टूडेंट ने डिग्री लेने के बाद अपनी समस्या को लेकर माइक पर बोलना चाहा तो प्रशासन ने उसे रोक दिया। निदेशक ने आकर स्टूडेंट डॉ. विक्रांत शर्मा को माइक पर बोलने से रोका। वहीं एम्स प्रशासन ने माइक बंद कर दिया। फिर भी विक्रांत ने अपनी बात कही कि मुझे डिग्री मिली है, न्याय नहीं। जस्टिस अभी बाकी है। समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल मुख्य अतिथि थीं। हालांकि डॉ. विक्रांत के माइक पर बोलने के दौरान मंत्री निकल गई थीं। जोधपुर एम्स का 5वां दीक्षांत समारोह रविवार को हुआ। इसमें 1,189 विद्यार्थियों को डिग्री दी गई। स्टूडेंट का दावा- जान-बूझकर तीन बार किया फेल एम्स जोधपुर के एम.सीएच. न्यूरोसर्जरी (बैच 2020-23) के छात्र डॉ. विक्रांत शर्मा ने अपने साथ हुई कथित एकेडमिक धांधली को लेकर आरोप लगाया- वर्ष 2021 में रैगिंग की शिकायत करने के बाद विभाग के कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों ने प्रतिशोध की भावना से लगातार तीन बार फेल किया। बाद में स्वतंत्र परीक्षा में मै पास हो गया। अब मुझे चौथे प्रयास में उत्तीर्ण होने की डिग्री दी गई है। उन्होंने दावा कि मुझे पहले ही प्रयास में पास घोषित किया जाना चाहिए था। मंत्री बोलीं- दीक्षांत समारोह नई यात्रा का आरंभ वहीं, राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने समारोह को संबोधित करके हुए कहा- एम्स जोधपुर देश के टॉप-10 मेडिकल कॉलेज में से एक है। दीक्षांत समारोह में डिग्री लेने वाले हेल्थकेयर प्रोफेशनल अपने प्रोफेशनल जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। वे समर्पण भाव के साथ देश की सेवा करेंगे। देश के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देंगे। उम्मीद है कि ये पूरी संवेदना के साथ मरीज का इलाज करेंगे। पटेल ने कहा- दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन की नई यात्रा का शुभारंभ है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा- चिकित्सा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का एक मिशन है। इसका उद्देश्य स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है। उन्होंने कहा- समाज और राष्ट्र ने उन्हें विश्वस्तरीय चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं आधुनिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रेक्चर उपलब्ध कराई है, इसलिए अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे विनम्रता, करुणा, सत्यनिष्ठा और सेवा-भाव के साथ समाज का ऋण चुकाएं। डॉक्टर का व्यवहार नहीं भूलता मरीज पटेल ने कहा- चिकित्सा विज्ञान निरंतर विकसित हो रहा है, इसलिए प्रत्येक डॉक्टर के लिए आजीवन सीखते रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा- पाठ्यपुस्तकें सिद्धांत सिखाती हैं, किंतु मरीज सबसे बड़े शिक्षक होते हैं। उन्होंने युवा डॉक्टर्स से प्रत्येक मरीज की बात धैर्यपूर्वक सुनने, संवेदनशीलता के साथ उपचार करने तथा सदैव मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा- मरीज दवा का नाम भले भूल जाए, लेकिन डॉक्टर का व्यवहार और उसके द्वारा दिया गया विश्वास जीवनभर याद रखता है। उन्होंने डॉक्टर्स से आह्वान किया कि वे केवल बीमारी का उपचार ही नहीं, बल्कि मरीज को पूर्ण रूप से स्वस्थ करने का प्रयास करें। देशभर में एम्स 7 से बढ़कर 23 हुए देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले एक दशक में हुए व्यापक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए पटेल ने कहा- केंद्र सरकार ने मेडिकल एजुकेशन्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार किया है। उन्होंने बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 384 से बढ़कर 830 से अधिक तथा एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो चुकी है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, जन औषधि केंद्रों, ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल ड्रोन, तथा बीमारियों की देशव्यापी स्क्रीनिंग जैसी पहलें गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी प्रयास सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। पेपरलीक दुर्भाग्यपूर्ण घटना राज्यमंत्री पटेल ने पेपर लीक पर केंद्र के नए कानून के मीडिया के सवाल पर कहा- प्रदर्शन करने वाले युवाओं की मांगों को सरकार ने माना है। प्रधानमंत्री ने कई बार कहा- देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है। पेपरलीक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और हम इस समस्या का जड़ से उन्मूलन करना चाहते हैं। इसलिए सरकार पूरा रोडमैप, खाका लेकर संसद में प्रस्तुत करेगी। इसमें हम चाहेंगे कि हमारे विपक्षी दल हैं। उनके भी सुझाव आएं, क्योंकि सभी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। पेपर लीक की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। डॉक्टर की पहचान उसकी संवेदनशीलता और करुणा समारोह को संबोधित करते हुए एम्स जोधपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) तेजस एम. पटेल ने कहा- एम्स जोधपुर उनके जीवन का सदैव एक अभिन्न हिस्सा रहेगा। जहां उन्होंने केवल मेडिकल नोलेज और इलाज का कौशल ही नहीं, बल्कि आजीवन साथ निभाने वाली मित्रताएँ और अमूल्य जीवन अनुभव भी अर्जित किए हैं। उन्होंने कहा- आज के युवा डॉक्टर्स ऐसे दौर में चिकित्सा जगत में प्रवेश कर रहे हैं, जहां रोबोटिक सर्जरी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), प्रिसिजन मेडिसिन तथा अत्याधुनिक तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से इन तकनीकी प्रगतियों को अपनाने के साथ-साथ प्रत्येक निर्णय के केंद्र में मरीज को रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हर मरीज के पीछे एक मानवीय कहानी होती है और एक अच्छे डॉक्टर की पहचान केवल उसके ज्ञान से नहीं, बल्कि उसकी संवेदनशीलता और करुणा से होती है। लोकसभा सांसद पी.पी. चौधरी ने विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा- यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उनके परिवार, शिक्षकों और समाज के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर की डिग्री केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का आजीवन संकल्प है। विभिन्न पाठ्यक्रमों के 1,189 विद्यार्थियों को डिग्री एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। पिछले 14 साल में एम्स जोधपुर की उल्लेखनीय उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के अंतर्गत वर्ष 2012 में स्थापित एम्स जोधपुर लगभग 45 विभागों एवं केन्द्रों, 221 संकाय सदस्यों, 3,000 से अधिक कर्मचारियों तथा 1,500 से अधिक विद्यार्थियों के साथ देश के अग्रणी शैक्षणिक चिकित्सा संस्थानों में अपनी पहचान बना चुका है। संस्थान प्रतिवर्ष लगभग 500 स्वास्थ्य पेशेवरों को राष्ट्र सेवा के लिए तैयार कर रहा है। डॉ. पुरी ने कहा कि एम्स जोधपुर देश के शीर्ष 10 चिकित्सा संस्थानों में स्थान प्राप्त कर चुका है तथा द्वितीय पीढ़ी के एम्स संस्थानों में प्रथम स्थान पर है। समारोह के दौरान एमबीबीएस, बी.एससी. (ऑनर्स) नर्सिंग, एम.एससी. (मेडिकल), एम.एससी. (नर्सिंग), मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (MPH), मेडटेक, पीएच.डी., एम.डी., एम.एस., एम.डी.एस., डी.एम. एवं एम.सीएच. सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के 1,189 विद्यार्थियों को डिग्री दी गईं। इसके साथ ही शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 25 मेधावी विद्यार्थियों को मेडल देकर सम्मानित किया गया।