शिक्षामंत्री मदन दिलावर टोंक में शिक्षकों को लेकर दिए अपने बयान के एक दिन बाद ही बैकफुट पर आ गए। उन्होंने कहा कि मैंने यह बयान सभी शिक्षकों के लिए नहीं कहा था। दिलावर के बयान का शिक्षक संगठनों ने भी विरोध किया था। सोमवार को बिड़ला सभागार में दिलावर ने कहा कि खटीक समाज के कार्यक्रम में मैंने कुछ लोगों को इंगित करते हुए कहा था कि आप लोग अच्छे अध्यापक हैं। अच्छा पढ़ाते हैं तो आप लोगों को सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाना चाहिए। अगर नहीं पढ़ाते हैं तो ऐसा नहीं करना चाहिए..(वह शब्द मैं दुबारा उपयोग नहीं कर रहा हूं)। मैंने सब शिक्षकों के लिए ऐसा नहीं कहा था। उन्होंने डेमेज कंट्रोल करते हुए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की अच्छे परिणाम के लिए तारीफ भी की। दिलावर ने कहा कि इस बार सरकारी स्कूलों का परिणाम अच्छा रहा। निजी स्कूल जो 1 लाख, 2 लाख, 3 लाख रुपए फीस लेते हैं वे भी सरकारी स्कूलों की बराबरी नहीं कर पाए। इसके लिए मेरे शिक्षकों को बधाई देता है, जिन्होंने एकाग्र होकर बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए अपना सब कुछ लगा दिया।अरस्तु संघ ने बर्खास्तगी की मांग की: अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ अरस्तु के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल ने कहा कि बयान से प्रदेश के चार लाख शिक्षक आहत हैं। दिलावर को शिक्षामंत्री के पद से बर्खास्त कर देना चाहिए। भास्कर पड़ताल - नसीहत देने वाले शिक्षामंत्री खुद पोतों को निजी स्कूलों में पढ़ा रहे कोटा। सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को नहीं पढ़ाने वाले सरकारी शिक्षकों को निकम्मा, फ्री की तनख्वाह लेने वाले बताने वाले शिक्षामंत्री मदन दिलावर के पोते ही कोटा के महंगे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। दिलावर के बेटे दीपक का पुत्र वेदांत दिलावर दिशा डेल्फी पब्लिक स्कूल (डीडीपीएस) में 12वीं में पढ़ रहा है। वहीं, दूसरे पुत्र पवन के बेटे जयवर्धन(कक्षा एक) और सार्थक (7वीं) बंसल पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं। दरअसल, रविवार को टोंक में हुए एक सम्मान समारोह में मंत्री दिलावर ने कहा था कि जो शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ाता, वे निक्कमे हैं और फ्री का वेतन लेते हैं। शिक्षा मंत्री से इस बारे में बात करने भास्कर रिपोर्टर ने दो बार मोबाइल पर कॉल किया लेकिन उन्होंने बात नहीं की। दोनों बार उनके निजी सहायक ने बताया कि वे कार्यक्रम में हैं। निजी सहायक को भास्कर रिपोर्टर ने पूरा विषय बताया लेकिन उन्होंने बात नहीं करवाई।