सरकार हर साल प्रदेश में हजारों किसानों को कृषि बिजली कनेक्शन देने की घोषणाएं करती है, लेकिन जयपुर डिस्कॉम में 6578 किसानों के कनेक्शन तीन महीने से अधिक समय से लंबित हैं। इनमें कई किसान डिमांड राशि जमा करा चुके हैं, फिर भी खेतों तक बिजली नहीं पहुंची। कहीं ठेकेदार ने पोल खड़े कर दिए, लेकिन तार नहीं खींचे तो कहीं लाइन बिछ गई, लेकिन ट्रांसफार्मर नहीं लगा। किसान कनेक्शन के लिए बिजली कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। डिमांड जमा होने के बाद कनेक्शन निश्चित समयावधि में कर दिए जाते हैं। डिस्कॉम के पास मैटेरियल की कोई कमी नहीं है। फिर भी कनेक्शन की पेंडेंसी को लेकर जांच करा लेता हूं। -विनय अग्रवाल, चीफ इंजीनियर, जयपुर डिस्कॉम जयपुर ग्रामीण दक्षिण में 590, कोटपूतली में 520 कनेक्शन लंबित डिस्कॉम प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जयपुर ग्रामीण दक्षिण सर्किल में 590, ग्रामीण उत्तर में 360 और कोटपूतली में 520 कृषि कनेक्शन लंबित हैं। अलवर में 420, सवाई माधोपुर में 490, डीग में 125, टोंक में 552, भरतपुर में 210 और दौसा में 520 कनेक्शन लंबित बताए गए हैं। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग के सप्लाई कोड-2021 के नियम 6.13 के अनुसार, कृषि कनेक्शन राज्य सरकार की कृषि कनेक्शन नीति के तहत जारी होते हैं। किसान के आवेदन पर डिस्कॉम डिमांड नोटिस जारी करता है। निर्धारित राशि जमा होने और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्राथमिकता से कनेक्शन दिया जाता है। जरूरत के अनुसार लाइन विस्तार, पोल, ट्रांसफार्मर और तकनीकी स्वीकृति का काम पूरा करना होता है। अनावश्यक देरी पर किसान डिस्कॉम के उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत कर सकता है। एस्टीमेट से ट्रांसफार्मर तक अटक रहे कनेक्शन, मिलीभगत के भी आरोप देरी के पांच प्रमुख कारण सामने आए हैं। इनमें कनिष्ठ अभियंताओं के स्तर पर एस्टीमेट बनाने में देरी, पोल-केबल-ट्रांसफार्मर की कमी, ठेकेदारों का समय पर काम पूरा नहीं करना, लाइन बिछाने में रास्ते के विवाद और फील्ड इंजीनियरों की कमजोर निगरानी शामिल हैं। जेपीडीसी के कुछ अभियंताओं और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत और आरडीएसएस से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इनकी विभागीय जांच जरूरी है। डिस्कॉम प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि कितने किसानों ने डिमांड राशि जमा कराई, कितने कनेक्शन तीन और छह महीने से लंबित हैं और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर क्या कार्रवाई हुई?