ऑपरेशन सिंदूर के बाद अजमेर जिले में आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में मॉकड्रिल की गई। शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे सायरन बजाकर आपात स्थिति का संकेत दिया गया। इसके साथ ही पूरा प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया। मॉक ड्रिल के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में 5 से अधिक बम ब्लास्ट होने की काल्पनिक सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत एजेंसियों ने तुरंत मोर्चा संभाला। कलेक्ट्रेट में ब्लैकआउट किया गया। मौके पर एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड और चिकित्सा टीमों को सक्रिय किया गया। अतिरिक्त जिला कलेक्टर सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग की। पहले देखें मॉकड्रिल की PHOTOS घायलों को सुरक्षित निकाला मॉक ड्रिल के तहत घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक इलाज देने और एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। रेस्क्यू टीमों ने घायलों को कलेक्ट्रेट परिसर से निकालकर जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय पहुंचाया, जहां पहले से चिकित्सा टीम तैनात रही। करीब 23 मिनट तक चले मॉक ड्रिल के दौरान SDRF की डॉग स्क्वायड टीम ने परिसर की तलाशी ली। फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। बाद में सायरन बजाकर रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त किया गया। मॉक ड्रिल के समापन के बाद अधिकारियों ने सभी संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधार के निर्देश भी दिए। सभी टीमों का देखा समय एडीएम सिटी नरेंद्र मीणा और एडिशनल एसपी हिमांशु जांगिड़ ने बताया- इस तरह की मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना और प्रतिक्रिया समय को बेहतर बनाना है। ड्रिल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, राहत कार्य और चिकित्सा सेवाओं की तत्परता का भी आंकलन किया गया।