अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) की नवनिर्मित मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। यहां से गुजर रहे नाले का स्वरूप बदल दिया गया। जगह बदल कर बनाए गए नाले के दोनों साइड बफर जोन भी नहीं छोड़ा। इस मामले की एडीए आयुक्त को शिकायत करने वाले अशोक मलिक का आरोप है कि इससे अन्य अतिक्रमियों के होंसले बुलंद हो गए हैं। ऐसे में जयपुर रोड के नाले पर अतिक्रमण बढ़ गए हैं। वहीं, आने वाले बरसाती सीजन में यहां पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पडे़गा। शिकायतकर्ता ने कहा कि अगर एडीए ने समय रहते इसका समाधान नहीं किया तो वे NGT में जाएंगे। करोड़ों की लागत से बने इस भवन का हश्र भी सेवन वंडर की तरह होगा। इसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस सम्बन्ध में बात करने के लिए अजमेर विकास प्राधिकरण की आयुक्त (IAS) के.नित्या से सम्पर्क किया लेकिन मोबाइल नो-रिप्लाई रहा। शिकायतकर्ता ने इन नियमों का दिया हवाला अशोक मलिक ने अपने पत्र में राजस्थान टाउनशिप नीति, 2024 के खंड 3.6 का उल्लेख करते हुए कहा है कि जल निकायों, नालों और बारिश के पानी की निकासी मार्गों के किनारे अनिवार्य बफर क्षेत्र रखा जाना कानूनन आवश्यक है। यदि नाला या वर्षा जल निकासी मार्ग की चौड़ाई 10 मीटर से अधिक है तो उसकी निर्धारित सीमा से कम से कम 9 मीटर का बफर रखा जाना आवश्यक है। वहीं, यदि नाला, छोटा जल निकाय या वर्षा जल निकासी मार्ग 10 मीटर तक चौड़ा है, तो उसकी निर्धारित सीमा से कम से कम 6 मीटर का बफर अनिवार्य है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि किसी नदी या नाले का चैनलीकरण किया जा चुका हो तो उसका बफर विकास योजना के अनुसार अथवा न्यूनतम 9 मीटर, जो भी अधिक हो, उतना रखा जाना चाहिए। राजस्थान सरकार के नगरीय विकास विभाग ने 20 फरवरी 2023 के आदेश द्वारा भी यही बफर मानक पहले से निर्धारित कर रखे थे। शिकायतकर्ता ने ये रखी मांग अशोक मलिक ने आयुक्त से मांग की है कि सक्षम नियोजन और इंजीनियरिंग अफसर के माध्यम से तत्काल स्थल निरीक्षण कराया जाए, नाले या जल निकासी मार्ग की वास्तविक सीमा का निर्धारण किया जाए। यह स्पष्ट किया जाए कि वहां 6 मीटर का बफर लागू होता है या 9 मीटर का और यदि निर्माण बफर क्षेत्र के भीतर पाया जाए तो उसे तुरंत हटाया जाए। अजमेर विकास प्राधिकरण को स्वयं अपनी अवैध दीवार को गिराना चाहिए, यदि वह जयपुर रोड, अजमेर स्थित नाले या जल निकासी मार्ग के बफर क्षेत्र में निर्मित पाई जाती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे राष्ट्रीय हरित अधिकरण का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होंगे। बाद में इसका हश्र भी सेवन वंडर जैसा होगा। मलिक ने कहा-जब नाले के साथ सरकारी विभाग ने ऐसा किया तो अन्य लोग भी अतिक्रमण कर अवैध निर्माण कर रहे हैं। ऐसे में पानी की निकासी अवरूद्ध होगी और आने वाले बरसाती दिनों में यहां पानी भरेगा। इससे आमजन को परेशानी उठानी पडे़गी। भवन का सेटबेक व नाले का बफर जोन अलग अलग छोड़कर भवन निर्माण करना चाहिए था। निर्माण शुरू होने के बाद कर दी थी शिकायत अशोक मलिक ने 5 अक्टूबर 2023 को सम्पक र्पोर्टल पर शिकायत कर बताया कि जयपुर रोड की नाला भूमि पर कब्ज़ा कर एक बहुमंज़िला बिल्डिंग का निर्माण चेयरमैन अजमेर डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा कराया जा रहा है। खसरा संख्या 576 व 579 जिसकी किस्म गै. मु. नाला है। राजस्थान हाई कोर्ट में पारित आदेशों की जानकारी होते हुए भी पब्लिक फंडिंग का दुरुपयोग किया जा रहा है और यह अवैध निर्माण करवाया जा रहा है। ऐसे में चल रहे निर्माण कार्य को रोका जाए व इस निर्माण को तोड़ने / ध्वस्त करने की कार्रवाई अमल में लाई जाए। इस शिकायत के बाद अगर इस अवैध निर्माण पर कोई भी पब्लिक या सरकारी फंडिंग का भुगतान किया जाता है तो वह सरकारी फंडिंग का दुरुपयोग माना जाएगा। इसकी वसूली जिम्मेदार अधिकारियो से की जाए। यहा मामला काफी गंभीर इसीलिए भी है, क्योंकि अजमेर विकास प्राधिकरण सरकार की एक नियम लागु व पालना करवाने वाली एजेंसी है, अगर एक लॉ इंफोर्सिंग एजेंसी या विभाग, ऐसे नियम विरुद्ध कार्य करेगा, तो जनता में इसका एक गलत प्रभाव भी पड़ेगा। अत: इस निर्माण को हटाया जाए। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब मामला बफर जोन छोड़ने को लेकर उठा है। ……… पढें ये खबर भी… अजमेर के 7 वंडर की फाइल और जिम्मेदार गायब:बिना मंजूरी पांच महीने पहले बनने लगे थे ये अजूबे, करोड़ों रुपए बर्बाद हुए अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 11 करोड़ की लागत से बनाए गए सेवन वंडर को तोड़ा जा रहा है। दैनिक भास्कर ने मामले की पड़ताल की। सामने आया कि प्रोजेक्ट में शुरुआत से ही लापरवाही बरती गई। स्वीकृति मिलने से पांच महीने पहले टेंडर जारी कर काम शुरू कर दिया। एक्स्ट्रा काम के नाम पर वर्क ऑर्डर से ज्यादा पेमेंट किया। एडीए से जमीन की एनओसी भी बाद में ली गई। प्रोजेक्ट की मूल फाइल तक गुम हो गई है। आज तक कोर्ट में पेश नहीं कर पाए। पूरी खबर पढें