अजमेर में नकली नोटों के साथ गिरफ्तार आरोपी डेढ़ महीने में 3 लोगों को करीब 4 लाख रुपए की डिलीवरी कर चुका था। आरोपी यह डिलीवरी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए संपर्क में आए एक युवक (मास्टरमाइंड) के निर्देश पर कर रहा था। हर डिलीवरी के बदले उसे 4 से 5 हजार रुपए मिलते थे। आरोपी विक्रम जोन (27) निवासी प्रिंस हिल्स कॉलोनी, बड़ी नागफणी (अजमेर) से पूछताछ में खुलासा हुआ कि मास्टरमाइंड ने इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन बातचीत में धीरे-धीरे उससे बातचीत बढ़ाई। इसके बाद विक्रम की आर्थिक स्थिति देखते हुए उसे नकली नोट चलाने का प्रस्ताव दिया। विक्रम ने नोटों की क्वालिटी खराब होने की कहकर मना कर दिया। इस पर मास्टरमाइंड ने विक्रम को करीब डेढ़ महीने पहले 17 लाख रुपए के नकली नोट देकर अलग-अलग लोगों को डिलीवरी करने का ऑफर दिया। आरोपी विक्रम जॉन से अब कई केंद्रीय एजेंसियां भी पूछताछ कर रही हैं। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि इस नेटवर्क के तार कहीं पाकिस्तान या किसी अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से तो नहीं जुड़े हैं। पुलिस आरोपी से मास्टरमाइंड और अब तक नकली नोटों की हुई डिलीवरी के हर पहलू पर पूछताछ कर रही है। दरअसल, अजमेर की गंज थाना पुलिस ने 12 जुलाई को विक्रम जॉन को गिरफ्तार किया था। उसके पास से एक बैग मिला था। बैग में 13 लाख 6 हजार रुपए के नकली नोट और प्रिंटिंग में इस्तेमाल होने वाली शीटें मिली हैं। इनमें 500 रुपए के कुल 2612 नकली नोट थे। दैनिक भास्कर ने कैमरे पर किया था एक्सपोज 9 जुलाई को नकली नोट खपाने वालों को दैनिक भास्कर ने कैमरे पर एक्सपोज किया था। इंस्टाग्राम की एक रील से शुरू हुई इन्वेस्टिगेशन नकली नोटों के उस सिंडीकेट तक ले गई, जो रील्स में काउंटिंग मशीन में डालकर दावा करते हैं- ये नोट न मशीन पकड़ पाएगी न एटीएम। रिपोर्टर ने ग्राहक बनकर नकली नोट के माफिया से कॉन्टैक्ट किया था। बाकायदा 1 लाख रुपए के बदले 10 लाख के नकली नोटों की डील ऑफर हुई थी। पढ़ें पूरी खबर... इंस्टाग्राम पर हुआ था कॉन्टैक्ट पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी विक्रम जॉन ने करीब डेढ़ महीने पहले इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने उससे संपर्क किया। धीरे-धीरे दोनों में बातचीत बढ़ने लगी। पहले उसने विक्रम की निजी जानकारी जुटाई। मास्टरमाइंड ने विक्रम की आर्थिक स्थिति देखी। लगातार बातचीत और वीडियो कॉल के जरिए मास्टरमाइंड ने विक्रम का विश्वास जीता। जब मास्टरमाइंड को भरोसा हो गया कि विक्रम उसके लिए काम कर सकता है, तब उसने नकली नोटों के नेटवर्क में शामिल करने की योजना बनाई। पहले बाजार में नोट चलाने को कहा, मना करने पर बदला रोल मास्टरमाइंड ने शुरुआत में विक्रम को 500 रुपए के नकली नोट बाजार में चलाने का प्रस्ताव दिया। विक्रम ने जब पहली बार नकली नोट देखे तो उनकी क्वालिटी खराब होने की बात कहकर बाजार में चलाने से इनकार कर दिया, लेकिन मास्टरमाइंड पीछे नहीं हटा। उसने रणनीति बदली और विक्रम को डिलीवरी बॉय की भूमिका ऑफर की। उसे कहा कि तय आदमी तक सिर्फ नोट पहुंचाने हैं। हर डिलीवरी पर 4 से 5 हजार रुपए देने का लालच दिया। 17 लाख के नकली नोट दिए, चौथी डिलीवरी करते पकड़ा गया पुलिस के अनुसार- करीब डेढ़ महीने पहले मास्टरमाइंड और आरोपी विक्रम पहली व आखिरी बार मिले थे। तब शहर के बस स्टैंड क्षेत्र के पास मास्टरमाइंड ने विक्रम को करीब 17 लाख रुपए के 500-500 के नकली नोट सौंपे थे। इसके बाद इंस्टाग्राम मैसेज और वीडियो कॉल के जरिए हर बार डिलीवरी का पता और सामने वाले व्यक्ति का हुलिया बताया जाता। विक्रम तय जगह पहुंचकर नोट सौंप देता और बदले में अपना कमीशन ले लेता। जांच में सामने आया कि गिरफ्तारी से पहले विक्रम ने 17 लाख रुपए में से तीन जगह करीब 4 लाख रुपए के नकली नोट पहुंचाए थे। विक्रम 12 जुलाई को 13.06 लाख लेकर चौथी डिलीवरी के लिए निकला था, तभी गंज थाना पुलिस ने उसे पकड़ लिया। शीट भी मिली, घर पर करता था कटिंग पूछताछ में सामने आया कि मास्टरमाइंड ने कुछ तैयार गड्डियां आरोपी विक्रम को दी थीं। वहीं कुछ नकली नोट शीट के रूप में दिए थे। विक्रम घर पर उनकी कटिंग करता था। बरामद सभी नकली नोट अलग-अलग सीरियल नंबर के पाए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन नोटों की छपाई कहां हुई। इन्हें तैयार करने वाला नेटवर्क कौन संचालित कर रहा है। पाकिस्तान कनेक्शन पर भी पूछताछ भारी मात्रा में नकली नोट मिलने के बाद केंद्रीय एजेंसियां भी अलर्ट हो गई हैं। कई केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों ने दरगाह थाने पहुंचकर आरोपी से सोमवार को लंबी पूछताछ की। उससे यह जानने का प्रयास किया कि कहीं पाकिस्तान या विदेशी नेटवर्क से निर्देश तो नहीं मिले। फिलहाल इस एंगल पर भी जांच जारी है और पुलिस किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रही। मास्टरमाइंड की असली पहचान अब भी रहस्य पूछताछ में विक्रम ने एक नाम का जिक्र किया है। वहीं पुलिस सहित खुद आरोपी को भी भरोसा नहीं है कि वह नाम असली है या फर्जी। पूरे नेटवर्क में केवल इंस्टाग्राम चैट और वीडियो कॉल के जरिए ही संपर्क होता था। इसी वजह से पुलिस के सामने मास्टरमाइंड की वास्तविक पहचान तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती है। अब सीसीटीवी से जुड़ेंगी कड़ियां आरोपी विक्रम जॉन को सोमवार को कोर्ट में पेश कर पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। वहीं पुलिस अब उस स्थान की पहचान कर रही है, जहां पहली बार नकली नोटों की खेप सौंपी गई थी। साथ ही जिन तीन लोगों को डिलीवरी की गई, उनकी पहचान भी की जा रही है। पुलिस संबंधित जगह के सीसीटीवी फुटेज खंगालकर मास्टरमाइंड और नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। नकली नोट बाजार में पहुंचे या नहीं, पुलिस कर रही जांच जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन चार लाख रुपए के नकली नोटों की डिलीवरी हो चुकी है। वे बाजार में चल चुके हैं या अभी भी किसी के पास हैं। पुलिस उन सभी लोगों और स्थानों की पहचान करने में जुटी है, जहां यह नकली नोट हो सकते हैं। BSF में रहे थे पिता पुलिस जांच में सामने आया कि विक्रम के पिता बीएसएफ से रिटायर्ड थे। रिटायरमेंट होने के बाद विक्रम के पिता पाली में बैंक गार्ड की नौकरी कर रहे थे। कुछ समय पहले उनकी मौत के बाद विक्रम अजमेर आकर नौकरी करने लगा। वह अविवाहित है। ………… अब पढ़िए भास्कर सीरीज की ये 2 खबरें… 1- पहली बार कैमरे पर नकली नोट गिरोह : 1 लाख के बदले 10 लाख के नोट, दावा- एटीएम भी नहीं पकड़ सकता, पार्ट-1 पहली बार कैमरे पर देखिए आपके पर्स तक नकली नोट पहुंचने वाले गैंग के चेहरे। इंस्टाग्राम की एक रील से शुरू हुई इन्वेस्टिगेशन नकली नोटों के उस सिंडीकेट तक ले गई, जो रील्स में काउंटिंग मशीन में डालकर दावा करते हैं- ये नोट न मशीन पकड़ पाएगी न एटीएम। पूरी खबर पढ़िए… 2- नकली नोट में गांधीजी का वाटरमार्क, सिल्वर लाइन भी:एक पेपर पर छपते 500 के 3 नोट, इंडस्ट्री की तरह गैंग में प्रोडक्शन दैनिक भास्कर एप की स्पेशल सीरीज के पहले पार्ट में आपने ऑन कैमरा नकली नोट माफिया के चेहरे देखे। भास्कर रिपोर्टर ने ग्राहक बनकर पूरे नेटवर्क को एक्सपोज किया। भास्कर की पड़ताल में नकली नोट बनाने वाले एक और गैंग का सच सामने आया। पूरी खबर पढ़िए…