अजमेर डिस्कॉम के उपभोक्ताओं को पीक ऑवर्स में सुबह 6 बजे से 8 बजे तक और शाम 6 बजे से 10 बजे तक बिजली के इस्तेमाल पर चार्ज ज्यादा देना होगा। आने वाले दिनों में टाइम के अनुसार बिजली खपत के आधार पर बिल आएगा। ‘टाइम ऑफ द डे’ टैरिफ कानून लागू होने के बाद अजमेर डिस्कॉम ने भी इसके लिए तैयारी कर ली है। पहले चरण में 10 किलोवाट से ज्यादा वाले कनेक्शन के कंज्यूमर को शामिल किया जाएगा। स्मार्ट मीटर लगने का काम पूरा होने के बाद इसे लागू किया जाएगा। बता दें कि अजमेर डिस्कॉम क्षेत्र में अजमेर के अलावा नागौर, चित्तौड़गढ़, सीकर, उदयपुर, झुंझुनूं, भीलवाड़ा, राजसमंद , बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन, सलूम्बर जिले आते हैं। समय के हिसाब से तय होगी बिजली की रेट केंद्र सरकार की ओर से टाइम ऑफ द डे (ToD) टैरिफ का कानून पहले ही जारी किया जा चुका है। अजमेर डिस्कॉम में भी इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है। पहले चरण में अजमेर डिस्कॉम के उन हाई वैल्यू कंज्यूमर को चिह्नित किया है, जिनके कनेक्शन 10 किलोवाट से ऊपर के है। इनकी संख्या करीब 4 लाख से ज्यादा है। अजमेर डिस्कॉम के चीफ इंजीनियर (मुख्यालय) राजीव वर्मा ने बताया कि पूरे 24 घंटे को 4 स्लॉट में बांटा गया है। इसे दो स्लॉट पीक ऑवर्स के रखें है, जिसका समय सुबह 6 से आठ बजे व शाम का समय सुबह छह बजे से 10 बजे तक रखा गया है। इस दौरान बिजली खपत पर ज्यादा चार्ज लगेगा। वहीं अन्य समय में उपयोग करने पर रिबेट मिलेगी। इसकी प्लानिंग कर ली गई है और जब स्मार्ट मीटर लग जाएंगे तो इसे लागू किया जाएगा। जानिए- स्मार्ट मीटर की क्या है स्थिति… अजमेर डिस्कॉम ने मई 2025 में स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू किया है। डिस्कॉम के 14 जिलों में करीब 54 लाख कज्यूमर हैं और 50 हजार से ज्यादा ट्रांसफार्मर हैं, जहां स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। अजमेर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (IT) एच.आर. कालेर ने बताया कि मई 2025 में इसकी शुरूआत की गई और करीब 17 लाख कंज्यूमर के मीटर लगाए जा चुके हैं। यह काम 27 महीने में पूरा किया जाना है। डिस्कॉम क्षेत्र में करीब 10 लाख ट्रांसफार्मर हैं, जिसमें 5 से 6 लाख कृषि कनेक्शन के, करीब 2 लाख सिंगल फेस के और करीब 2 लाख खुद कंज्यूमर के पर्सनल ट्रांसफार्मर है, वहां इन मीटरों की जरूरत नहीं है। करीब 50 हजार में स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं और 16 हजार में लग चुके हैं। न तेज चलता और न एक्सट्रा पैसा लगेगा कालेर ने बताया कि लोगों में भ्रांतियां हैं कि ये मीटर तेज चलता है और डिस्कॉम पैसा वसूलेगा, ऐसा कुछ नहीं है। यही कारण है कि कुछ जगहों पर विरोध होता है। जबकि इसे लगाने से पहले दो बार जांच होती है। सही पाए जाने पर इसे लगाया जाता है। ऐसी बातों से भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। इस स्मार्ट मीटर में एक डिवाइस सिम होती है, जो मोबाइल टावर से बिजली कंपनियों में लगने वाले रिसीवर तक सिग्नल पहुंचाती है। इससे बिजली कंपनियां दफ्तर से मीटर की रीडिंग और निगरानी कर सकती हैं। वर्तमान में रीडिंग में होने वाली गफलत से भी निजात मिल जाएगी। मीटर के साथ किसी प्रकार की छोड़छाड़ की जानकारी भी डिस्कॉम को हाथों-हाथ मिल सकेगी। --- ये खबर भी पढ़िए- राजस्थान में बिजली कनेक्शन के नियमों में बड़ा बदलाव:33 केवी तक के कनेक्शन पर नहीं लेनी होगी इंस्पेक्टर की मंजूरी, खुद कर सकेंगे सर्टिफाई राजस्थान सरकार ने बिजली कनेक्शन और छोटे पावर प्लांट की मंजूरी से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। (पढ़िए पूरी खबर)