भास्कर न्यूज | बाड़मेर जिला अस्पताल की एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस बाड़मेर के एक सर्विस सेंटर पर पिछले 6 दिन से खड़ी है। 37 लाख की एएलएस 2022 में कोरोनाकाल के दौरान राजमेस जयपुर से अस्पताल को मरीजों की सुविधा के लिए उपलब्ध करवाई गई थी। 23 फरवरी 2024 को एएलएस मरीज पहुंचाकर जोधपुर से वापस बाड़मेर आ रही थी। इस दौरान दूदवा सरहद पर रोड पर खड़ी चीणों भरी ट्रैक्टर ट्रॉली से पीछे से भिड़ी और दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इसके बाद इसे 27 फरवरी 2024 को जोधपुर ठीक करवाने के लिए भेजा गया। संबंधित कंपनी ने ठीक करने का 24 लाख का कॉटेशन दिया था। गाड़ी के एक्सीडेंट होने पर बीमा कंपनी ने क्लेम नहीं दिया। सर्विस सेंटर ने गाड़ी तो तैयार कर दी लेकिन अस्पताल प्रशासन ने देरी की। 22 महीने खड़ी रहने के बाद 14 फरवरी को गाड़ी बाड़मेर पहुंची। बिशाला निवासी भर्ती मरीज को 14 मार्च को एएलएल से जोधपुर रेफर किया गया लेकिन बायतु के पास पहुंचते ही एंबुलेंस का कूलिंग सिस्टम फैल हो गया। मरीज को जैसे-तैसे जोधपुर पहुंचाने के बाद से अस्पताल में खड़ी कर दी गई। अस्पताल से रोजाना 2-3 गंभीर रोगी जिन्हें वेंटिलेटर पर रेफर किया जाता है उन्हें इसी गाड़ी से भेजना होता है लेकिन ढाई साल से अस्पताल में एएलएस एंबुलेंस सेवा बंद है। अस्पताल के आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड से हर महीने 60 से 70 गंभीर मरीज जोधपुर रेफर किए जाते हैं। एएलएस बंद होने के कारण परिजनों को निजी एंबुलेंस के लिए 18 से 20 हजार रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। मध्यम और गरीब वर्ग के लिए यह खर्च उठाना भारी पड़ रहा है। ^एलएस के दोबारा खराब होने की जानकारी नहीं है। यदि वह सर्विस सेंटर पर है, तो उसे तुरंत दुरुस्त करवाकर मरीजों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। फिलहाल अस्पताल में अन्य एंबुलेंस पर्याप्त हैं, हालांकि वेंटिलेटर की सुविधा सिर्फ एएलएस में ही होती है। >2022: कोरोना काल में अस्पताल को मिली एंबुलेंस। > 23 फरवरी 2024: दूदवा सरहद पर ट्रैक्टर-ट्रॉली से भिड़ी। > 27 फरवरी 2024: मरम्मत के लिए जोधपुर भेजी गई। > 14 फरवरी 2026: करीब 2 साल बाद ठीक होकर बाड़मेर लौटी। > 14 मार्च 2026: पहले ही फेरे में कूलिंग सिस्टम फेल।