अलवर की एडीजे कोर्ट संख्या-3 ने मंदिर में पानी भरने के विवाद में हुई युवक की हत्या के मामले में फैसला सुनाया है। न्यायाधीश ज्योति कुमारी सोनी ने मामले में 3 दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने दोषियों पर 1 लाख 1 हजार 500 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इस पूरे फैसले के दौरान सबसे हैरान करने वाला नजारा तब देखने को मिला, जब सजा सुनने के बाद तीनों दोषी कोर्ट से बाहर निकले। उनके चेहरों पर पछतावे की जगह मुस्कान थी। कोर्ट परिसर से निकलते समय वे मुस्कुरा रहे थे और उन्होंने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों की तरफ देखकर बेफिक्री से कहा- ये बढ़िया हुआ। सबसे पहले देखिए, मामले से जुड़ी PHOTOS… अब 3 पॉइंट में समझिए पूरा मामला… 1. लाठी-डंडों से पीटा था, इलाज के दौरान तोड़ा दम सरकारी वकील अजीत यादव ने बताया कि पीड़ित चंदनमल ने एमआईए थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चंदनमल ने रिपोर्ट में बताया था कि उनके बेटों महादेवा, बाबूलाल, खुशबू और कंवरदास पर पड़ोसी रामकिशन उर्फ कय्यूम, ममता, भगवानदास, नथ्थूमल उर्फ नाथूमल, हरीश, दौलतराम, मीना और पूनम ने लाठी-डंडों, लोहे की रॉड और अन्य हथियारों से हमला किया था। इस हमले में महादेवा और बाबूलाल के सिर में गंभीर चोटें आई थीं। महादेवा (38) की 2 दिन बाद जयपुर के एसएमएस (SMS) अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने हत्या सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच पूरी की और कोर्ट में चालान पेश किया। 2. मंदिर में पानी भरने को लेकर हुआ था विवाद रिपोर्ट के अनुसार, चंदनमल और रामकिशन के परिवार के बीच गांव के मंदिर परिसर में लगे नलों से पानी भरने को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन जब चंदनमल के परिवार की पानी भरने की बारी आई, तो आरोपियों ने एकराय होकर उन पर हमला कर दिया। इस खूनी संघर्ष में परिवार के कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए और महादेवा की जान चली गई। 3. 23 गवाह और 60 दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर फैसला कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 23 गवाहों और 60 दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर भगवानदास, दौलतराम और हरीश को दोषी मानते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, अन्य आरोपियों को पर्याप्त सबूत न होने के कारण बरी कर दिया गया। मुख्य दोषी भगवानदास पहले से ही जीएसटी (GST) चोरी के एक मामले में जयपुर जेल में बंद है। अब इस हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।