अलवर जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में आज बड़े दिलचस्प नजारे देखने को मिले। कांग्रेस के जिला पार्षद जगदीश जाटव बाइक के पीछे रस्सी से अपनी कुर्सी बांधकर पहुंचे। वहीं निर्दलीय पार्षद और कांग्रेस समर्थित संदीप फौलादपुरिया पत्थर की बनी चक्की लेकर पहुंचे। दोनों पार्षदों ने इस तरह सरकार और प्रशासन के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया। बैठक के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के करीबी माने जाने वाले जिला पार्षद जगदीश जाटव ने कहा- जब जिला प्रमुख के लिए ही सरकार कुर्सी की व्यवस्था नहीं कर पा रही है, तो उन्हें अपनी कुर्सी साथ लेकर आनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार नहीं, बल्कि "सर्कस" चल रहा है। सरकार जनप्रतिनिधियों को दबाव में रखना चाहती है। इसके बाद जाटव ने टेबल बजाते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं। दो साल बाद कांग्रेस की सरकार बनेगी और टीकाराम जूली मुख्यमंत्री होंगे। जो अधिकारी सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं, उनका भी इलाज किया जाएगा। जगदीश जाटव ने कहा- वह अपनी कुर्सी इसलिए साथ लेकर आए क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं था कि साधारण सभा की बैठक में उनके बैठने की व्यवस्था होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में हुई जिला प्रशासन की बैठक में जिला प्रमुख के लिए कुर्सी तक नहीं लगाई गई थी। उस दौरान कलेक्टर आर्तिका शुक्ला ने कहा था कि जिनके नाम की नेम प्लेट के सामने कुर्सी नहीं है, वे बाहर जा सकते हैं। जबकि भाजपा जिला अध्यक्षों के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी। जाटव ने कहा कि जब जिले के प्रथम नागरिक के लिए वहां कुर्सी नहीं लगाई गई, तो उन्हें आशंका थी कि जिला परिषद की बैठक में भी उनके लिए कुर्सी नहीं होगी। जिला पार्षद संदीप फौलादपुरिया पत्थर की चक्की लेकर बैठक में पहुंचे। उन्होंने कहा- कुछ दिन पहले शाहजहांपुर में चक्की का उद्घाटन किया गया था, लेकिन इससे लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मंत्री को उद्घाटन के बजाय क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए था। शाहजहांपुर अस्पताल में आज भी लैब, ट्रॉमा सेंटर और जनरेटर जैसी सुविधाएं नहीं हैं। कस्बे में नगरपालिका, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा पीएचईडी, पीडब्ल्यूडी, यूआईटी और वन विभाग के कार्यालय भी नहीं हैं। किसान आंदोलन के दौरान टूटी सड़कें पिछले पांच वर्षों से नहीं बन सकी हैं। वहीं सीमावर्ती गांव पलावा, बीजवाड़ और दाधिया में पुलिस चौकी की भी मांग लंबे समय से लंबित है।