अलवर जिला हॉस्पिटल में इलाज कराने आ रहे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को पिछले 10 सालों से मिल रही निःशुल्क सीटी स्कैन की सुविधा अचानक बंद हो गई है। ऐसे में मरीजों को मजबूरन निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर 2500 से 3500 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। आखिर क्यों बंद हुई सुविधा साल 2016 में 'क्योरवेल डायग्नोस्टिक' कंपनी के साथ 10 साल के लिए पीपीपी मॉडल पर अनुबंध किया गया था। 10 साल का एग्रीमेंट अप्रैल में पूरा हो गया। पीएमओ की पहल पर निदेशालय ने केवल दो महीने (जून तक) का अस्थाई विस्तार दिया था, जो अब खत्म हो चुका है। 50 की जगह अब सिर्फ 5-10 स्कैन पहले हॉस्पिटल में रोजाना औसतन 40 से 50 मरीजों का फ्री सीटी स्कैन किया जाता था। अब सुविधा बंद होने से केवल अति-आपातकालीन स्थिति में आने वाले 5 से 10 मरीजों का ही स्कैन हो पा रहा है। बाकी मरीजों को निजी सेंटरों पर रेफर किया जा रहा है। निजी सेंटरों का खेल, गरीब मरीज पस्त बाजार में एक सीटी स्कैन कराने पर मरीज को कम से कम 2,500 से 3,500 तक चुकाने पड़ रहे हैं। सरकारी अस्पताल में फ्री सुविधा मिलने से गरीब तबके को बड़ी राहत थी, जो अब छिन गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सीटी स्कैन के अलावा एमआरआई जांच सेवा भी अनुबंध पर ही चल रही है। फिलहाल एमआरआई जांचें तो नियमित रूप से हो रही हैं, लेकिन इसका टेंडर/अनुबंध भी जल्द ही समाप्त होने वाला है। अगर समय रहते नया टेंडर या एक्सटेंशन नहीं मिला, तो मरीजों के लिए संकट और गहरा जाएगा। जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ प्रवीण शर्मा का कहना है कि जून में समय सीमा समाप्त होने के बाद से अब तक 6 बार निदेशालय को एक्सटेंशन के लिए पत्र भेजे जा चुके हैं। यह आमजन के हित से जुड़ी बेहद लाभकारी योजना है। जैसे ही निदेशालय से मंजूरी मिलेगी, सेवा फिर से शुरू कर दी जाएगी।