नमस्कार, अजमेर की आनासागर झील में मछलियां मरीं तो भाजपा नेता बोले-मछलियों की उम्र हो गई है। जयपुर में ट्रक ड्राइवर ने कहा कि RTO वालों ने सिर फोड़ दिया। लगता है जंगल में चुनाव की तारीखें तय हो गई हैं और भीलवाड़ा पुलिस ने रीलबाजों की रील बना दी। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. जंगल में भी चुनाव आ गए क्या? लगता है जंगल में भी चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। क्योंकि जंगल से ऐसी तस्वीरें आ रही हैं जिन पर भरोसा करना मुश्किल। झालाना के जंगल का राजा है राणा। राणा एक लेपर्ड है। झालाना में राणा का डंका बजता है। मजाल जो कोई जानवर उसके पास भी फटक जाए। लेकिन इस बार तो हद हो गई। राणा जी छोटी तलैया के पास बैठे सुस्ता रहे थे। मोरों से मंत्रणा चल रही थी। राणा के अंदाज पर टिटहरी रीझ रही थी। इसी बीच एक नीलगाय मदमस्त चलते तलैया तक आई। राणा को एक नजर ऐसे देखा जैसे जंगल में उसकी कोई वकत नहीं रही। गुस्ताख नीलगाय बेखौफ होकर पानी पीने लगी। मोर-टिटहरी ने सोचा कि आज तो नीलगाय की खैर नहीं। पानी पीने के बाद नीलगाय राणा जी तरफ बढ़ी और सींग हिलाए। दुम दबाकर राणा जी भागे और दो फर्लांग दूर जाकर दम साधा। टिटहरी का भ्रम टूट गया। मोरों ने नीलगाय का विजय-घोष किया। नीलगाय की चुनौती देखकर लगता है कि इस बार जंगल के चुनाव में उसका पलड़ा भारी है। इधर, हार से बौखलाया लेपर्ड गम भुलाने शराब के ठेके पर जा पहुंचा। सुना है वहां जानवरों का गुस्सा इंसानों पर उतारा है। 2. मछलियां मर गईं क्योंकि 'उम्र' हो गई मछली जल की रानी है। जीवन उसका पानी है। लेकिन पानी ही अगर जहर हो जाए तो मछली कहां जाएगी। मछलियों को पता है कि आनासागर झील का पानी बेहद दूषित और खराब हो चुका है। उसमें जीने लायक ऑक्सीजन नहीं बची है। बारिश ने भी 15 दिन तक बेरुखी दिखाई। ऊपर से शहर भर का कचरा, मलबा, सीवर और तमाम गंदगी आनासागर के हिस्से आती है। ऐसे में बड़ी तादाद में मछलियां मर गईं। कचरा, गंदगी और मछलियों की स्मैल से परेशान होकर विरोधियों ने मास्क लगाकर खूब धरना-प्रदर्शन किया, नारे लगाए। मछलियों को उम्मीद बंधी कि अब कुछ कारगर काम होंगे। एक बार फिर आनासागर साफ पानी से लबरेज होगा। लेकिन सत्तावाली पार्टी के नेताजी और पूर्व शहर अध्यक्ष महोदय के बयान से मछलियों को झटका लगा। नेताजी ने कहा- मछलियां इसलिए मर गईं क्योंकि उनकी उम्र हो गई थी। नेताजी का बयान सुनकर बेहोश हुई मछलियां अब होश में आने को तैयार नहीं। 3. हाल-ए-RTO डाकू और लुटेरों की भक्ति से प्रसन्न होकर एक बार ब्रह्माजी ने उन्हें वरदान दिया। कहा- कलयुग में भी तुम्हारी लूट और डकैती चलती रहेगी। तुम्हें RTO के नाम से जाना जाएगा। जो ट्रक वाले बिल्ली के रास्ते काटने से नहीं रुकते। चौराहों पर धरे टोटकों से नहीं डरते। उन्हें RTO की गाड़ी दिखते ही अपने देवता याद आने लगते हैं। चलते ट्रक में वे मन्नत मांगने लगते हैं। जान की खैर मनाते हैं। जयपुर से खिलौने लेकर झारखंड जाते ट्रक ड्राइवर कालूराम को RTO ने पकड़ लिया। कहा-तुम्हारा खिलौना ओवरलोड है। 50 हजार का चालान कटेगा। RTO से बचने का एक पैंतरा यह है कि पकड़े जाओ तो वीडियो बनाना शुरू कर दो। कालूराम ने वही किया। मगर एक ही फटके में मोबाइल की हवा निकल गई। इसके बाद जो कुछ हुआ, वह कालूराम ने यूं बताया- आरटीओ वाले गाड़ी से डंडा निकालकर लाए और मेरा सिर फोड़ दिया। पुलिस भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही। बेचारा कालूराम। ट्रक में हेलमेट लगाकर भी नहीं चल सकता। सिर बचाना है तो गांठ ढीली करनी ही पड़ेगी। अब सुनो हाकिम सिंह का किस्सा। वे कंडक्टरी करते थे। जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर बस खरीद ली। सवारी में लंबे रूट पर चलने लगे। बस के मालिक होते हुए भी कंडक्टर का पैसा बचाने के लिए खुद कंडक्टरी करने लगे। हाल ही उनकी बस को पकड़ कर RTO ने सीज करने की तैयारी कर ली। हाकिम सिंह वहीं फट पड़े। परिवहन अधिकारी की कार के सामने खड़े होकर खुद पर डीजल डाल लिया। रो-रोकर भीड़ को हालात सुनाने लगे- मुझ पर 18 लाख का कर्जा है। दोनों किडनी खराब हैं। आरटीओ गाड़ी चलने नहीं देता। बताओ चारा ही क्या बचा ? अब मरना ही बेहतर। आरटीओ इंस्पेक्टर साहब ने सारा तमाशा देख इत्मीनान से कहा- कार्रवाई से बचने के लिए नाटक करता है। 4. चलते-चलते.. युद्ध हिम्मत से लड़े जाते हैं, हथियारों से नहीं। यह फिल्मी डायलॉग न तो रूस-यूक्रेन के लिए है, न अमेरिका-ईरान के लिए और न ही कॉकरोचों के लिए। यह बात भीलवाड़ा के उन नौजवानों के लिए जिन्होंने जुगाड़ करके दुनाली, छर्रे वाली गन या आदिमकाल की बंदूक के साथ रील बनाई। रील बनाते हुए खुद के डॉन और माफिया होने का ऐलान किया। उन्हें लगा कि उनकी उम्र वाले दूसरे लड़कों पर भभका पड़ेगा और समाज में उनका भय कामय होगा। ऐसे मच्छरों से पुलिस भी तंग। जो हैं कुछ नहीं और रीलें डाल-डालकर माहौल खराब कर रहे। इनका नंबर आना था, आ गया। जिले की 5 टीमों ने एक साथ कार्रवाई कर रीलबाजों को दबोच लिया और थाने लाकर कहा- तुम्हारी रील हम बनाते हैं। इसके बाद लड़कों के दयनीय हालत के वीडियो सामने आए, जिनमें वे हाथ जोड़कर फटी आंखों से एक ही बात कह रहे थे- गलती हो गई भाइयों। आप ये गलती मत करना। वरना… इनपुट सहयोग- शिवम ठाकुर (जयपुर), निखिल सिंह (जयपुर), स्मित पालीवाल (जयपुर), भरत मूलचंदानी (अजमेर), महावीर बैरवा (टोंक), मनीष जैन (भीलवाड़ा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।