अलवर के जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से 50 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया गया है। मृतका के पति सीताराम यादव ने बताया कि उनकी पत्नी मीरा का पहले फेफड़ों (लंग्स) का ऑपरेशन हो चुका था। करीब 7 दिन पहले उसके हाथों और शरीर में दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उसे अलवर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती के बाद से ही उनकी पत्नी की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। परिजनों का कहना है कि वे गुरुवार से ही डॉक्टरों से मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए जयपुर रेफर करने की मांग कर रहे थे, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी एक नहीं सुनी। शनिवार सुबह से भी उन्होंने कई लोगों के माध्यम से डॉक्टरों से रेफर करने की गुहार लगाई, लेकिन फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। सीताराम यादव के अनुसार, शनिवार शाम करीब 5 बजे एक नर्स ने उनकी पत्नी को इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद अचानक महिला का शरीर लाल पड़ गया और उसे घबराहट व झटके आने लगे। परिजनों ने तुरंत नर्स को बुलाया, लेकिन समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाया। कुछ देर बाद एक महिला डॉक्टर को बुलाया गया, जिन्होंने दूसरे डॉक्टर के साथ मिलकर ईसीजी की और महिला को मृत घोषित कर दिया। परिवार का आरोप है कि अगर समय रहते मरीज को जयपुर के उच्च स्तरीय अस्पताल में रेफर कर दिया जाता, तो उसकी जान बच सकती थी। उनका कहना है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण ही महिला की मौत हुई है। वहीं, इस मामले में जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. पीसी सैनी ने कहा कि परिजनों की ओर से शिकायत पत्र मिलते ही वरिष्ठ डॉक्टरों की एक कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि 7 दिन के भीतर यह जांच की जाएगी कि किन-किन डॉक्टरों ने महिला का इलाज किया और यदि कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।