अलवर में स्कूली छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा और कानूनी साक्षरता के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान अलग-अलग स्कूलों में सेमिनार आयोजित किए गए, जिनमें बच्चों को साइबर अपराधों से बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। शहर के नवीन स्कूल में उमेश खत्री, आईटी एक्सपर्ट, ने बच्चों को बताया कि आज हर घर में व्हाट्सएप समेत विभिन्न प्रकार के एप्लिकेशन उपयोग में लिए जा रहे हैं। वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि हम सभी साइबर दुनिया से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज के साइबर अपराधों में तकनीक से अधिक मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) का उपयोग होता है। अपराधी पहले व्यक्ति के दिमाग को प्रभावित करते हैं और फिर उसके माध्यम से मोबाइल या अकाउंट तक पहुंच बनाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कोई भी व्यक्ति सीधे मोबाइल हैक नहीं कर सकता, बल्कि हमारी छोटी-छोटी गलतियों के कारण हम स्वयं ही अपने मोबाइल का एक्सेस ठगों को दे बैठते हैं। इसलिए सतर्क रहना बहुत जरूरी है। जिला एवं सेशन न्यायाधीश अनंत भंडारी ने बच्चों को समझाते हुए कहा कि मोबाइल, इंस्टाग्राम या किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड “1234” जैसा आसान नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ऐसे पासवर्ड आसानी से खोले जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं करनी चाहिए और किसी को भी OTP साझा नहीं करना चाहिए, क्योंकि साइबर अपराधी लोगों के दिमाग से खेलकर ही धोखाधड़ी करते हैं। उन्होंने बताया कि हर मंगलवार को अगले 8 महीनों तक स्कूलों में साइबर अपराध, उनसे जुड़े कानून और अन्य विषयों पर बच्चों को जानकारी दी जाएगी। इस पहल का नाम “ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे” रखा गया है।स्कूलों में शिकायत पेटिकाएं भी लगाई गई हैं, जिनमें छात्र-छात्राएं अपनी शिकायतें डाल सकते हैं। इन शिकायतों की समीक्षा स्वयं न्यायाधीश द्वारा की जाएगी।