दौसा जिले में चलती ट्रेन में एक यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द होने पर वह बेहोश होकर सीट पर गिर गया। ट्रेन में बैठे बांदीकुई गवर्नमेंट कॉलेज के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह प्रभाकर ने तुरंत कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) देना शुरू किया। TTE और आरपीएफ के जवान ने भी CPR दिया और यात्री की जान बचा ली। मामला खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में बुधवार रात 9 बजे का है। जिस समय यात्री की तबीयत बिगड़ी, उस समय ट्रेन दौसा में खान भाकरी के पास से गुजर रही थी। CPR देकर जान बचाने के बाद यात्री को दौसा रेलवे जंक्शन पर उतारकर जिला हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां प्राथमिक इलाज के बाद उसे जयपुर रेफर कर दिया गया। तबीयत बिगड़ने से बेहोश होकर सीट पर गिरा यात्री खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस बांदीकुई से जयपुर की ओर रवाना हुई थी। ट्रेन में छतरपुर (मध्य प्रदेश) के करीब 40 लोगों का एक ग्रुप भी बैठा था। वे खाटूश्यामजी के दर्शन के लिए जा रहे थे। इसी दौरान दौसा से करीब 5 किलोमीटर पहले खान भाकरी के पास ग्रुप में शामिल मुकेश (40) पुत्र रामचरण की अचानक तबीयत बिगड़ गई। देखते ही देखते वह बेहोश होकर सीट पर गिर गया। उसे अचेत देख ट्रेन की बोगी (कोच) में मौजूद यात्री घबरा गए। यात्रियों ने तुरंत रेलवे और मेडिकल टीम को सूचना दी। इसी दौरान बांदीकुई गवर्नमेंट कॉलेज के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह प्रभाकर ने बेहोश यात्री को तुरंत सीपीआर देना शुरू किया। बोगी में शोर सुनकर आरपीएफ के जवान और रेलवे के टीटीई भी वहां पहुंच गए। उन्होंने भी सीपीआर देने में सहयोग किया। समय रहते दी गई इस प्राथमिक मदद से यात्री की जान बच गई। ट्रेन के दौसा रेलवे जंक्शन पहुंचने पर यात्री को ट्रेन से उतारा गया। उसे तुरंत जिला हॉस्पिटल पहुंचाया गया। मरीज में हार्ट अटैक के लक्षण थे जिला हॉस्पिटल की इमरजेंसी यूनिट के नर्सिंग इंचार्ज महेंद्र कुमार मीणा ने बताया- दौसा रेलवे स्टेशन से युवक को इलाज के लिए हॉस्पिटल लाया गया था। मरीज में हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई दे रहे थे। उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन मेडिकल टीम ने बिना देर किए उसे तुरंत CPR दिया। समय रहते CPR मिलने से उसकी जान बच गई। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया। लोगों से सीपीआर की ट्रेनिंग लेने की अपील ट्रेन में यात्री को सीपीआर देने वाले इंद्रजीत ने बताया- मुकेश की हालत बहुत गंभीर हो गई थी। वह बेहोश हो चुके थे और उन्हें सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी। ऐसे में मैंने बिना एक पल गंवाए तुरंत CPR देना शुरू किया। इंद्रजीत ने कहा कि संकट कभी भी, कहीं भी और किसी के साथ भी आ सकता है। ऐसे समय में मूकदर्शक बनकर खड़े रहने के बजाय लोगों को आगे बढ़कर मदद करनी चाहिए। इंद्रजीत ने सभी लोगों से अपील की कि वे CPR और प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) का प्रशिक्षण जरूर लें। यह छोटा सा कौशल किसी की जान बचाने में बहुत अहम साबित हो सकता है।