अलवर में काली मोरी फाटक पर 200 से ज्यादा मजदूरों ने सवा 7 घंटे में रेलवे अंडरपास बना दिया। इस दौरान मजदूरों ने इतना पसीना बहाया कि 80 कैंपर पानी पी गए। एक मिनट भी आराम नहीं किया। इस अंडर पास के बनने से बच्चों की स्कूल बसों के करीब 10 किलोमीटर बच जाएंगे। वहीं, आसपास की कॉलोनी, ऑफिस और इंडस्ट्री में आने-जाने वाले लोगों के 2 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। रेलवे पटरी के ऊपर से जाने का जोखिम भी कम हो जाएगा। बता दें कि अंडरपास का मुख्य काम पूरा हो गया है। अब साइड की अप्रोच बनाने का काम बचा है। करीब 2 महीने में पूरा काम होगा। इसके बाद आमजन की आवाजाही शुरू हो जाएगी। बाल वाहिनी ड्राइवर बोले 10 किलोमीटर बचेंगे अलवर के राठ स्कूल के ड्राइवर मुकेश राजोरिया ने बताया- इस अंडरपास से बहुत सहूलियत मिलेगी। करीब 10 किलोमीटर का चक्कर कम हो जाएगा। अब तक दो-दो पुल पार करके जाना पड़ता है। स्कूल के बच्चों के करीब 25 से 30 मिनट बचेंगे। राजस्थान सोलर में काम करने वाले युवक अनिल गुप्ता ने बताया- अंडरपास बनने से घूमकर आने में काफी समय बचेगा। केवी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र ने कहा कि अंडरपास से फायदा होगा। पहले घूमकर आते थे। अब सीधे आ जाएंगे। अंबेडकर आने-जाने में सहूलियत मिल जाएगी। ऑफिस में सीधे आ सकेंगे बिजली विभाग में काम से जा रहे 76 साल के बुजुर्ग हरिओम शर्मा ने कहा- अंडरपास बनने से रास्ता छोटा हो जाएगा। पहले कई बार रेल पटरी कूद कर गए हैं। पहले ओवरब्रिज के ऊपर से आना पड़ता था। अब सीधे आएंगे। मजूदर ने कहा - 80 कैंपर पानी पी गए अंडरपास में काम करने वाले मजदूर प्रहलाद बैरवा ने बताया- इतनी मेहनत की पूछो मत। एक मिनट का आराम नहीं मिला। 200 से अधिक लोगों को 80 कैंपर पानी पिलाया गया। मैं सिफ पानी पिलाने में लगा था। मजदूरों को इतना समय नहीं मिला कि वे खुद आकर पानी पी सकें। पानी पिलाने के लिए मजूदर लगाने पड़े थे। ठेकेदार यश जैन ने बताया कि किसी भी मजदूर को एक सेकंड आराम नहीं मिला। मजदूरों की छोड़िए कर्मचारी व अधिकारी भी लगे रहे। ये भी पढ़ें… VIDEO में देखिए कैसे बनता है रेलवे अंडरपास:काम पूरा करने के लिए सिर्फ सवा 7 घंटे मिले, 200 लोग 8 मशीनों के साथ जूटे अलवर में कालीमोरी अंडरपास 8 घंटे में बनकर होगा तैयार:15 से 20 बड़ी मशीन और 100 से ज्यादा मजदूर करेंगे काम; जयपुर-दिल्ली के बीच ट्रेन रहेगी बंद