फेफड़ों का कैंसर (लंग कैंसर) दुनिया की सबसे गंभीर और तेजी से बढ़ने वाली कैंसर बीमारियों में शामिल है। डॉक्टर्स के अनुसार स्मोकिंग, बढ़ता एयर पॉल्युशन और प्रोटीनयुक्त फूड की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। चिंताजनक बात यह है कि पाली जैसे छोटे जिले में भी हर सप्ताह औसतन दो नए मरीज बांगड़ हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं। अधिकांश मामलों में बीमारी का पता देर से चलने के कारण इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हर साल 1 अगस्त को वर्ल्ड लंग कैंसर डे (World Lung Cancer Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच के लिए प्रेरित करना और इससे जुड़े मिथकों को दूर करना है। पढ़िए रिपोर्ट… धूम्रपान, प्रदूषण और कमजोर खानपान बढ़ा रहे खतरा पाली के बांगड़ हॉस्पिटल के श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मण सोनी ने बताया कि लंग कैंसर के तीन प्रमुख कारण हैं- स्मोकिंग की लत, एयर पॉल्यूशन और प्रोटीनयुक्त भोजन की कमी। लंबे समय तक बीड़ी, सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वाले लोगों में लंग कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि सीमेंट फैक्ट्री, निर्माण कार्य और धूल-धुएं वाले वातावरण में लंबे समय तक काम करने वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं, भोजन में प्रोटीन और फाइबर की कमी से इम्युनिटी पावर कमजोर होती है, जिससे शरीर बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। डॉ. सोनी के अनुसार, बांगड़ हॉस्पिटल में हर सप्ताह औसतन दो नए मरीज लंग कैंसर की आशंका के साथ पहुंच रहे हैं। पाली में जांच की सुविधा, इलाज के लिए जाना पड़ता है जोधपुर बांगड़ हॉस्पिटल में लंग कैंसर की शुरुआती जांच की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट और इलाज की व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को जोधपुर रेफर किया जाता है। लक्षण मिलने पर मरीजों की एक्स-रे, सीटी स्कैन, ब्रोंकोस्कोपी, बायोप्सी और PET स्कैन जैसी जांच कराई जाती है। कैंसर की पुष्टि होने पर आगे के इलाज के लिए जोधपुर भेजा जाता है। इलाज की सुविधा नहीं होने के कारण जिले में लंग कैंसर के मरीजों और इससे होने वाली मौतों का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है। लंग कैंसर की प्रमुख जांचें लंग कैंसर की 4 स्टेज स्टेज-1: कैंसर केवल फेफड़ों तक सीमित रहता है। समय पर इलाज मिलने पर पूरी तरह ठीक होने की संभावना सबसे अधिक होती है। स्टेज-2 और स्टेज-3: कैंसर आसपास के लिम्फ नोड्स तक फैल चुका होता है। इस अवस्था में उपचार से जीवनकाल बढ़ाया जा सकता है, हालांकि पूरी तरह ठीक होना कठिन हो सकता है। अधिकांश मरीज इसी चरण में अस्पताल पहुंचते हैं। स्टेज-4: कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल चुका होता है। इस स्थिति में बीमारी को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं होता, लेकिन उपचार से मरीज के लक्षणों में राहत और जीवन की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है। समय पर जांच से हो सकता है बचाव श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मण सोनी का कहना है कि लगातार खांसी, खून के साथ खांसी आना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, बिना कारण वजन घटना और लंबे समय तक थकान जैसे लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और स्मोकिंग से दूरी बनाकर लंग कैंसर के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। दरअसल, फेफड़ों का कैंसर तब होता है जब फेफड़ों की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले सकती हैं। यह बीमारी फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है और शरीर के अन्य हिस्सों तक भी फैल सकती है