बांसवाड़ा के टिंबा-गांबड़ी में वागड़ मेवाड़ कल्याण विकास संस्थान द्वारा संचालित महात्मा गांधी कॉलेज के फर्जीवाड़े में भास्कर इन्वेस्टिगेशन में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। एक ही भवन में पांच कॉलेज चलाने के मामले के बाद अब कॉलेज के कागजी स्टाफ का मामला सामने आया है। कॉलेज का 70 प्रतिशत टीचिंग स्टाफ केवल कागजों पर काम कर रहा है। दस्तावेजों में करीब 50 से 55 का स्टाफ दर्शाया गया है, जिनमें से 30 से ज्यादा उत्तर प्रदेश (यूपी) के रहने वाले हैं, जो असल में धरातल पर मौजूद ही नहीं हैं। इसके बावजूद गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय (GGTU) से इनका बकायदा अनुमोदन हो रखा है। भास्कर ने जब यूपी के रहने वाले इन कथित असिस्टेंट प्रोफेसरों से संपर्क किया, तो कई चौंकाने वाले राज सामने आए। पड़ताल में स्पष्ट हुआ कि 15 से 25 हजार रुपए देकर सिर्फ इनका नाम कागजों में चलाया जा रहा है। कॉलेज की जांच चल रही है, उनको नोटिस भी दे रखा है। निजी संस्थान देखने वाले इसकी जांच कर रहे हैं। स्टाफ की भी जांच कर रहे हैं। -कैलाश चंद्र यादव, अतिरिक्त आयुक्त, कॉलेज शिक्षा निदेशालय स्टाफ तो पूरा ही आता है, इसमें कोई दिकक्त नहीं हैं, अभी संस्थान में जांच भी कर रहे हैं, जांच में जो भी होगा सामने आ जाएगा। यूपी के कहीं के भी स्टाफ हो सकता है। वर्धमान जैन, अध्यक्ष,वागड़ मेवाड़ कल्याण विकास संस्थान कागजों में भर्तियां, साल में एक बर आते हैं यूपी में बिजली विभाग में ठेकेदार, रिकॉर्ड में असि. प्रोफेसर; मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले मुकेश कुमार का नाम बांसवाड़ा के महात्मा गांधी कॉलेज में एजुकेशन विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर दर्ज कर रखा है। हकीकत में मुकेश कुमार मुरादाबाद में बिजली विभाग में ठेकेदारी का काम करते हैं। मुकेश ने खुद स्वीकार किया कि वे पिछले डेढ़ साल से बांसवाड़ा आए ही नहीं हैं। कॉलेज वाले कभी-कभार बुलाते हैं, तब वे जाते हैं, बाकी वह पूरा समय अपनी ठेकेदारी का काम करते हैं। मेरठ के कॉलेज में पढ़ा रहे, यहां सिर्फ नाम चल रहा है मेरठ निवासी अरुण कुमार का नाम जूलॉजी (प्राणी विज्ञान) के असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर चल रहा है। असल में अरुण यूपी के सीसीए कॉलेज में पढ़ाते हैं। अरुण ने बताया कि महात्मा गांधी कॉलेज में नाम जोड़ने के लिए उन्हें केवल एक बार 15 हजार रुपए दिए गए थे। उनका केवल नाम चल रहा है और वे बांसवाड़ा कभी नहीं आते। सालाना 25 हजार में किराए पर है हिंदी का अध्यापक बरेली निवासी जालिश अहमद का नाम कॉलेज में हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में दर्ज है। जालिश यूपी के डब्ल्यूटीएम कॉलेज (रुहेलखंड यूनिवर्सिटी) में पढ़ाते हैं। जालिश ने बताया कि बांसवाड़ा के कॉलेज में नाम चलाने के लिए सालाना 25 हजार रुपए दिए जाते हैं। बांसवाड़ा जाकर नियमित रूप से पढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती और वहां केवल उनका नाम चल रहा है। टीम से छिपाई स्टाफ लिस्ट, मौके पर सिर्फ 11 सदस्य भास्कर ने पहले भी इसी कॉलेज में मान्यता और अन्य फर्जीवाड़े का किया था। यहां 25 कमरों के एक ही भवन में 5 अलग-अलग कॉलेज (फार्मेसी, 2 वर्षीय बीएड, 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड, STC और बीए/बीएससी) चल रहे हैं, जिनमें 1200 से ज्यादा स्टूडेंट्स नामांकित हैं। कॉलेज प्रशासन ने एक ही लोकेशन और एक ही नक्शे पर पांचों कॉलेजों की मान्यता ले रखी है। जिसके बाद श्री गोविंद गुरु राजकीय महाविद्यालय की टीम ने अपने निरीक्षण में भी इस फर्जीवाड़े की पुष्टि की है। निरीक्षण के समय संस्था में केवल 11 संकाय सदस्य (फैकल्टी) ही उपस्थित मिले। स्थिति यह थी कि कॉलेज प्रशासन ने जांच दल को कार्यरत कर्मचारियों की लिस्ट तक उपलब्ध नहीं करवाई। जांच रिपोर्ट में यह भी पकड़ा गया कि मुख्य गेट पर केवल एक कॉलेज का बोर्ड है, जबकि अन्य कॉलेजों के नाम वाले बोर्ड पहली मंजिल पर छिपाकर रखे गए थे।