भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की भोपाल बेंच में हुई सुनवाई में गोशाला के रखरखाव और चारागाह के संबंध में कार्यान्वयन आवेदन खारिज कर दिया है। आवेदनकर्ता पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू की ओर से आरोप लगाया गया था कि नगर निगम ने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया। हालांकि, जवाब में बताया गया कि जिन अवलोकनों का उल्लेख किया है, वे अनिवार्य निर्देश नहीं थे। वे केवल सलाह के रूप में दी गई बातें थीं। अदालत द्वारा 11 सितंबर 2017 को दिए आदेश में गोशाला के प्रशासन और देखभाल को अनिवार्य रूप से निर्धारित नहीं किया था। जवाबी पक्ष ने बताया कि ग्राम पंचायत दरीबा के अनुरोध पर एक गोशाला का निर्माण किया है। इसका रखरखाव ग्राम पंचायत कर रही है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि 400 बिस्वा भूमि केवल खनन गतिविधियों के लिए दी गई थी। यह गोशाला की स्थापना के लिए नहीं थी। एनजीटी ने यह भी नोट किया कि जवाबी पक्ष ने पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों के तहत 2 लाख 6 हजार 388 पेड़ लगाए हैं। उनकी जीवित रहने की दर 95% बताई गई है। अंत में एनजीटी ने कहा कि कार्यान्वयन आवेदन में अब कुछ भी शेष नहीं है। इसलिए इसे निस्तारित किया जाता है। एनजीटी में हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान जाजू द्वारा दायर कार्यान्वयन आवेदन का निपटारा किया गया। इस आवेदन में जाजू ने आरोप लगाया कि नगरपालिका अधिकारियों ने गौशाला और चरागाह की देखभाल नहीं की। हालांकि पर्यावरण विभाग के अधिवक्ता ने जोर दिया कि न्यायालय के आदेश केवल परामर्शात्मक थे। उन्होंने कहा कि गौशाला का प्रशासन ग्राम पंचायत दरीबा द्वारा किया जा रहा है। राज्य की ओर से मौजूदा भूमि की स्थिति भी स्पष्ट की गई। बताया गया कि यह भूमि खनन गतिविधियों के लिए आवंटित की गई थी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य ने क्षेत्र में पौधरोपण की गतिविधियों को तेज किया है।