केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही कांग्रेस पार्टी को लेकर राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि कांग्रेस सदन में चर्चा से भाग रही है, जबकि केंद्र सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर सदन में चर्चा करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का कहना है कि पिछले 10 सालों में 152 पेपर लीक हुए हैं। लेकिन वह इस पर सदन में चर्चा नहीं करना चाहती है, क्योंकि कांग्रेस के नेता जानते हैं कि अगर इस मुद्दे पर वे चर्चा करेंगे तो सबका चेहरा सामने आ जाएगा। चर्चा होगी तो यह भी सामने आएगा कि कौन सा पेपर, किस राज्य में और किसके शासनकाल में लीक हुआ। इसलिए कांग्रेस बहस से बचना चाहती है। अरुण चतुर्वेदी आज प्रदेश बीजेपी कार्यालय में मीडिया को संबोधित कर रहे थे। गहलोत सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस के शासनकाल में 19 पेपर लीक हुए थे। उस समय के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने पेपर लीक पर ठोस कार्रवाई को लेकर अजमेर से पदयात्रा निकाली थी। लेकिन उसके बाद भी तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन जैसे ही प्रदेश में हमारी सरकार बनी, हमने पेपर लीक पर कार्रवाई के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया और पेपर लीक में शामिल लोगों को पकड़ने का काम किया। वहीं केंद्र सरकार ने नीट (NEET) पेपर लीक मामला सामने आते ही तुरंत उसे रद्द करते हुए फिर से परीक्षा करवाई और दोषी लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की। कांग्रेस अराजकता फैलाने वालों के साथ खड़ी उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह देश के युवाओं के साथ खड़ी है या उन तत्वों के साथ जो देश में अराजकता फैलाने का प्रयास करते हैं। प्रदर्शन में ऐसे लोग भी शामिल थे, जिनका अतीत विवादित नारों और आंदोलनों से जुड़ा रहा है। कांग्रेस को यह तय करना होगा कि उसकी राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ है या अराजकता फैलाने वाले समूहों के साथ है। चतुर्वेदी ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं पर भी काम हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।