राजस्थान के सरकारी हॉस्पिटलों में प्रसव सखी तैनात करने की तैयारी है। प्रसव सखी गर्भवती महिलाओं और हॉस्पिटल के बीच कॉर्डिनेशन का काम करेगी। गर्भवती के एडमिट होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक की सभी प्रक्रियाओं में प्रसव सखी की अहम भूमिका होगी। इसके अलावा हॉस्पिटलों में हेल्प डेस्क भी बनाई जाएगी। एक के बाद एक गर्भवती महिलाओं की मौतों के बाद हाईरिस्क प्रेग्नेंसी केसेज को लेकर वन टू वन ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसमें आशा, एएनएम, मेडिकल ऑफिसर और एम्बुलेंस की भी जिम्मेदारी तय कर दी गई है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… हाल ही में कोटा, जोधपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा समेत कई जिलों में एक के बाद एक 17 से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की मौतें हो चुकी है और किडनी फेल्योर के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। अब तक प्रसूताओं की मौतों का असली कारण सामने नहीं आ पाया है। ऐसे में राज्य सरकार ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की महिलाओं को हाई प्रायोरिटी पर रखते हुए तैयारी शुरू कर दी है। इस मामले में मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों और ग्राउंड लेवल के कार्मिकों के साथ हाईरिस्क प्रेग्नेंसी केसेज का रिव्यू किया है। इसी कड़ी में प्रसूताओं की मुश्किलें कम करने के लिए अब प्रसव सखी तैनात करने की तैयारी है। ये होगी प्रसव सखी की भूमिका प्रसव सखी गर्भवती को डिलीवरी और आवश्यक सर्जरी तक टाइम टू टाइम मदद करने, डिलीवरी के बाद प्रसूता और नवजात को आवश्यक सेवाओं से जोड़ने, वैक्सीनेशन आदि की जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी रहेगी। रजिस्ट्रेशन, जांच-सोनोग्राफी, ब्लड बैंक से कॉर्डिनेशन, हाईरिस्क प्रेग्नेंसी महिलाओं के संबंध में जानकारी, एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं के लिए व्यवस्था और प्रसव के बाद इमर्जेंसी में कॉर्डिनेशन करने के लिए भी प्रसव सखी की जिम्मेदारी तय की जा रही है। प्रसव सखी की संख्या इस आधार पर निर्धारित होगी कि हॉस्पिटलों के औसतन महीने के कितनी डिलीवरी केस आते हैं, इनमें हाई रिस्क कितने होते हैं, सिजेरियन कितने होते हैं, दूसरे केंद्रों से रेफर होकर कितने केस आते हैं। प्रसव सखी की कार्य सीमा स्वास्थ्य विभाग प्रसव सखी के कार्यों की सीमा भी तय कर रहा है। इसके अनुसार प्रसव सखी डॉक्टर्स की तरह परामर्श नहीं देगी। दवा प्रिस्क्राइब नहीं करेगी। खुद गर्भवती महिलाओं का इलाज भी नहीं करेगी। सामान्य या सिजेरियन डिलीवरी का निर्णय नहीं लेगी। जांच रिपोर्ट की व्याख्या भी नहीं करेगी। इसके अलावा डॉक्टर्स के डिसीजन में हस्तक्षेप भी नहीं करेगी। उसका रोल केवल सहायता, मार्गदर्शन, सुविधा और कॉर्डिनेशन तक सीमित होगी। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क बनाएंगे प्रसव सखी के अलावा हर चिन्हित सरकारी हॉस्पिटल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क भी स्थापित करने की तैयारी है। हेल्प डेस्क गर्भवती महिला और उसके परिजनों के लिए हॉस्पिटलों में फर्स्ट कॉन्टैक्ट सेंटर के रूप में कार्य करेगा। हॉस्पिटलों में सबसे पहले हेल्प डेस्क पर ही गर्भवती महिला और परिजनों को अटैंड किया जाएगा। हेल्प डेस्क पर गर्भवती महिला के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में सहायता की जाएगी। इसके अलावा मरीज और परिजनों की शिकायत-समस्याओं को संबंधित अधिकारी तक पहुंचाई जाएगी। राजस्थान के 10 जिलों में ज्यादा हाईरिस्क प्रेग्नेंसी केसेज राजस्थान में 37 हजार से अधिक हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के केसेज हैं। इनमें सीकर, जयपुर, चूरू, कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, उदयपुर और झुंझुनूं जिले शामिल हैं। प्रसूताओं की मौत के मामलों को देखते हुए अब हाई रिस्क मुख्य सचिव ने प्रत्येक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की नामवार लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एएनएम तथा सीएचओ को प्रत्येक हाईरिस्क गर्भवती महिला के साथ नियमित मॉनिटरिंग के लिए अटैच करें। आवश्यकता होने पर रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें। प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि हर हाईरिस्क प्रेग्नेंसी की हालात के अनुसार स्ट्रेटजी अपनाई जा रही है। रैफरल सिस्टम को सुधारने पर फोकस किया जा रहा है। …. राजस्थान में प्रसूताओं की मौत से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. प्रसूताओं की मौत रोकने के लिए सरकार का बड़ा फैसला:हर गर्भवती की डिलीवरी से पहले होगी लिस्टिंग; कार्ड में होगी मेडिकल हिस्ट्री प्रदेश में हो रही प्रसूताओं की मौत को लेकर राज्य सरकार ने अब एक्शन प्लान तैयार किया है। अब हर जिले में गर्भवतियों की डिलीवरी से पहले लिस्टिंग होगी। पूरी खबर पढ़िए… 2. राजस्थान- एक बीमारी के कारण हो रही प्रसूताओं की मौत:डॉक्टर बोले- अचानक हो जाती है खून की कमी; जानिए क्यों हो रही ये समस्या कुछ महिलाओं में डिलीवरी के बाद लगातार खून में कमी हो रही है और उसका असर उनकी किडनी पर पड़ रहा है। डॉक्टर्स के अनुसार- इन सभी का कारण HELLP (हेल्प) सिंड्रोम बीमारी है। पूरी खबर पढ़िए…