थार मुस्लिम एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी ने पीर अहमद शाह जिलानी दरगाह शरीफ स्थित मदरसे में स्वतंत्रता संग्राम की सेनानी, समाजसेविका, भारत छोड़ो आंदोलन की अग्रणी नेता अरुणा आसफ अली को जयंती पर याद किया। सोसाइटी ने उनके जीवन, संघर्ष, राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए सलामी दी। सोसाइटी के संयोजक अबरार मोहम्मद ने कहा कि अरुणा आसफ अली निर्भीक महिलाओं में शामिल रही। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उन्होंने बताया कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अरुणा आसफ अली ने मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराया। इससे देश में स्वतंत्रता की नई चेतना जगी। लाखों लोग अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित हुए। सचिव इमरान खान गौरी, मुख्तियार भाई नियारगर ने कहा कि अरुणा आसफ अली केवल स्वतंत्रता सेनानी नहीं रहीं। वह शिक्षिका, समाजसेविका, राजनीतिक कार्यकर्ता व पत्रकारिता से भी जुड़ी रही। वह 1958 में दिल्ली की पहली महिला महापौर बनी। मौलाना शेर मोहम्मद, हज ट्रेनर बच्चू खान कुम्हार, टीपू सुल्तान ने कहा कि युवा पीढ़ी को अरुणा आसफ अली के संघर्ष, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समर्पण से प्रेरणा लेनी चाहिए। अंत में सोसाइटी ने अरुणा आसफ अली के आदर्श समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया। बाड़मेर.जयंती कार्यक्रम में मौजूद लोग।