पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, रुके हुए विकास कार्यों, सरकारी भुगतान, पेंशन, जोधपुर के अधूरे प्रोजेक्ट और नीट पेपर लीक आंदोलन सहित कई मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कम बारिश पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को अभी से अकाल जैसी संभावित स्थिति से निपटने की तैयारी करने की सलाह दी। गहलोत शुक्रवार रात जोधपुर दौरे पर पहुंचे थे। सर्किट हाउस में आज कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। गहलोत बोले- कई विभागों को भुगतान अटका हुआ गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में कई विभागों के भुगतान रुके हुए हैं। दोबारा बिल बनवाने के आदेश दे रहे है। ताकि भुगतान को लम्बित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, पेंशन समय पर नहीं मिल रही और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के रिटायरमेंट लाभ तक लंबित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की मॉनिटरिंग कमजोर पड़ गई है और प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा रही है। गहलोत ने दावा किया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था भी लगातार बिगड़ रही है। अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार सरकार को फीडबैक दे रहा है लेकिन सरकार उसे गंभीरता से नहीं ले रही है। वहीं कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल के भाजपा सरकार में गहलोत सरकार से अपराध कम होने के दावे का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वो मुख्यमंत्री को खुश करने में लगे हुए हैं, इसलिए ऐसे बयान देते हैं। जोधपुर में प्रोजेक्ट नहीं हो रहे शुरू जोधपुर के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि शहर में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के भवन बनकर तैयार हैं लेकिन उनका संचालन शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, लाइब्रेरी और अन्य परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भवन तो तैयार हैं, लेकिन खिलाड़ियों के लिए कोच, उपकरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। हॉस्टल बनने के बावजूद विद्यार्थियों को बाहर रहना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री से चर्चा की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उन्होंने अपनी सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में उनकी सरकार ने ऐतिहासिक काम किए। चिरंजीवी योजना के माध्यम से इलाज और ऑपरेशन का खर्च सरकार ने वहन किया तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन का दायरा बढ़ाया। उन्होंने दावा किया कि आज भी लोग इन जनकल्याणकारी योजनाओं को याद करते हैं। अकाल के बन रहे हालात बारिश को लेकर गहलोत ने कहा कि इस बार प्रदेश के करीब 18 से 20 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में अकाल जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अभी से पेयजल, पशुओं के लिए पानी, चारे और राहत कार्यों की व्यापक तैयारी करनी चाहिए। उनके अनुसार संकट आने के बाद नहीं, बल्कि पहले से प्रबंधन करना ही सुशासन की पहचान है। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने चार बार अकाल जैसी परिस्थितियों का सामना किया है और उस समय बेहतर प्रबंधन के कारण पूरे देश में राजस्थान की सराहना हुई थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में "काम के बदले अनाज" जैसी योजनाओं के जरिए हर जरूरतमंद तक रोजगार और खाद्यान्न पहुंचाया गया। प्रशासन को निर्देश थे कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोए और कर्मचारी घर-घर जाकर जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश की जनता के हित में केंद्र से मदद मांगनी पड़े तो इसमें कोई शर्म की बात नहीं है। छात्रों से वादाखिलाफी कर रही सरकार नीट पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन पर गहलोत ने कहा कि इस मुद्दे को सबसे पहले राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया। इसके बाद कांग्रेस ने जिला और ब्लॉक स्तर तक आंदोलन चलाया और छात्रों की आवाज बुलंद की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों से वादे किए, लेकिन उन्हें समय पर पूरा नहीं किया। गहलोत ने कहा कि यदि सरकार अपने आश्वासन पूरे नहीं करेगी तो युवा उसे माफ नहीं करेंगे। उनका कहना था कि कांग्रेस छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और जनता के बीच संघर्ष जारी रखेगी।