नागौर जिले के अठियासन गांव में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में भादवासी के त्यागी संत हेतमराम महाराज कथा वाचन कर रहे हैं। कथा के दौरान उन्होंने नशा छोड़ने, जीव-जंतुओं की सेवा करने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कथा सुनने के लिए अठियासन, मूंडवा, खेण, ईनाणा, फिड़ौद सहित आसपास के गांवों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। आसपास के गांवों से पहुंच रहे श्रद्धालु अठियासन में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में अठियासन, मूंडवा, खेण, ईनाणा, फिड़ौद समेत आसपास के गांवों से लोग प्रतिदिन कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। कथा का वाचन भादवासी के त्यागी संत हेतमराम महाराज के श्रीमुख से किया जा रहा है। कथा को बताया जीवन को दिशा देने का माध्यम कथा के दौरान त्यागी संत हेतमराम महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कथा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में अच्छे विचार, अच्छे संस्कार और सकारात्मक सोच को अपनाना चाहिए। नशा छोड़ने और पर्यावरण बचाने का दिया संदेश संत हेतमराम महाराज ने समाज से नशे की प्रवृत्ति छोड़ने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने जीव-जंतुओं की सेवा करने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। अच्छे संस्कार और सत्कर्म अपनाने की अपील संत ने आध्यात्मिक ज्ञान की महत्ता बताते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में सेवा और सत्कर्मों को अपनाना चाहिए। इससे परिवार और समाज दोनों का कल्याण होता है। भजनों और जयकारों के बीच चला कथा श्रवण कथा के दौरान भक्तिमय माहौल देखने को मिला। श्रद्धालु भजनों पर भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए और भगवान के जयकारे लगाते रहे। पूरे कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा। आयोजकों के अनुसार नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन धार्मिक अनुष्ठानों और पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा।