झुंझुनूं के गांव बजावा में मंड्रेला नगरपालिका के लिए प्रस्तावित 'फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट' (FSTP) को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा। प्रशासन ने प्लांट के लिए जमीन देने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेताया है कि अगर प्लांट लगा तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे। ग्रामीणों ने फैसले को जनविरोधी बताते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की है। ​बच्चों के स्कूल–मैदान पास, इसलिए विरोध ​ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट के लिए प्रस्तावित जमीन (खसरा नंबर 843/559) से महज 200 मीटर दूर सरकारी स्कूल है। बच्चों के खेलने का मैदान भी इस प्लांट से करीब 100 मीटर की दूरी पर है। ग्रामीणों कु मुताबिक-जहां बच्चों को शुद्ध हवा और स्वच्छ वातावरण मिलना चाहिए, वहां सरकार मंड्रेला शहर की गंदगी डंप करने की योजना बना रही है। इससे आस–पास के इलाके में संक्रामक बीमारियां फैलने का डर है। बच्चों और स्थानीय लोगों की जिंदगी पर खतरा मंडरा रहा है। शहर का कचरा गांव में क्यों डाल रहे ​बजावा के ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन उनके गांव को दूसरे शहर का डंपिंग यार्ड बनाने पर तुला हुआ है। ग्रामीणों की दलील है कि प्रशासन एक तरफ तो 'स्वच्छ भारत मिशन' का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ बच्चों के स्कूल, खेल मैदान और घरों के पास जानलेवा प्रदूषण फैलाने वाला प्लांट लगा रही है। ​ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गांव वाले अपने खर्चे से पैसा जुटाकर यहां पार्क बनवा रहे हैं। पेड़–पौधे लगवा रहे हैं। लेकिन उनकी इन सभी कोशिशों पर प्लांट लगते ही पानी फिर जाएगा। गांव वालों का कहना है कि यह पर्यावरण संरक्षण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने जैसा है। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में ये हैं मुख्य मांगे ​मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा है कि यदि भूमि आरक्षण के आदेश को तुरंत प्रभाव से निरस्त नहीं किया गया, तो यह विरोध और उग्र रूप लेगा। ​ग्रामीणों की मुख्य मांगें: