चिकित्सा विभाग की ओर से चलाए जा रहे पोलियो अभियान के तहत जीरो से पांच साल तक के बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जा रही है। इसके लिए बांगड़ हॉस्पिटल की कोविड ओपीडी को पोलियो वैक्सीन डिपो बनाया गया है, लेकिन यहां मूल सुविधाओं का अभाव सामने आया है। कोविड ओपीडी हॉल में न तो पंखे लगे हैं और न ही पीने के पानी की व्यवस्था है। ऐसे में पोलियो अभियान में लगे नर्सिंगकर्मियों को तेज गर्मी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोविड ओपीडी को बनाया गया पोलियो वैक्सीन डिपो पोलियो अभियान के तहत नर्सिंगकर्मी बांगड़ हॉस्पिटल की कोविड ओपीडी से पोलियो दवा के बॉक्स लेकर निर्धारित मोहल्लों में जाते हैं। वहां घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने के बाद वे वापस आकर दवा बॉक्स इसी डिपो में जमा करवाते हैं। पिछले तीन दिन से यह प्रक्रिया लगातार चल रही है। पंखे और पानी की सुविधा नहीं नर्सिंगकर्मियों का कहना है कि कोविड ओपीडी हॉल में एक भी पंखा नहीं लगा है। इसके अलावा पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। तेज गर्मी के बीच यहां आने-जाने वाले स्टॉफ को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। पोलियो अभियान में लगे कर्मचारी सुबह से ही यहां पहुंचते हैं और फील्ड में जाने से पहले तथा लौटने के बाद कुछ समय यहीं रुकते हैं। स्टॉफ ने जताई परेशानी एक नर्सिंगकर्मी ने बताया कि इस समस्या को लेकर अधिकारियों से बात की गई थी। लेकिन उन्हें जवाब मिला कि पोलियो अभियान के लिए केवल तीन दिन ही यहां आना है और दवा लेकर फील्ड में जाना है। कर्मचारी के अनुसार, यह भी कहा गया कि यहां नियमित ओपीडी नहीं चलती, इसलिए पंखों की व्यवस्था नहीं की जा रही है। नर्सिंगकर्मियों का कहना है कि तेज गर्मी में बिना पंखों के हॉल में बैठना मुश्किल हो रहा है। सुबह से दवा के बॉक्स लेने और जमा करवाने के दौरान उन्हें पसीने से तर होना पड़ रहा है। पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें बाहर से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गर्मी और उमस के कारण स्टॉफ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।