जिले के दो अलग-अलग वन क्षेत्रों में भीषण आग लगने से सैकड़ों पेड–पौधे राख हो गए। गढ़ी उपखंड के बाबा का कुआं के जंगल में सबीते दो दिनों से लगी आग से काफी नुक्सान हुआ है। वहीं गनोड़ा-घाटोल रोड पर भी शुक्रवार को आग लगने से हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय से सूचना देने के बवाजूद अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। ​बाबा का कुआं: 48 घंटे सुलगता रहा जंगल ​जौलाना के पास स्थित बाबा का कुआं जंगल में अज्ञात कारणों से लगी आग पर समय रहते काबू नहीं किया जा सका। ग्रामीणों का कहना है कि आग लगने की सूचना तुरंत ही वन विभाग के अधिकारियों को दे दी गई थी। लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया जिससे आग बड़े एरिया में फैल गई और दुर्लभ पेड़ पौधों को भी अपनी चपेट में ले लिया। अगले दिन मौके पर पहुंचे अधिकारी भूरालाल चरपोटा ने बताया कि ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड की मदद से बीती रात आग पर काबू पा लिया गया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। ​गनोड़ा-घाटोल रोड पर भी मची अफरा-तफरी इधर, गनोड़ा-घाटोल रोड स्थित जंग में शुक्रवार दोपहर अचानक आग लग गई। लपटें देख राहगीरों और ग्रामीणों में अफरा–तफरी मच गई। सूचना मिलते ही वन विभाग अधिकारी नारायण लाल, दीपक पाटीदार और कल्पेश पाटीदार मौके पर पहुंचे। वन कर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से घेराबंदी कर आग को आगे बढ़ने से रोका। रात करीब 1 बजे आग पर काबू पाया गया। ​ग्रामीणों का आरोप वन विभाग की लापरवाही ​स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। समय से सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग का रिस्पांस सिस्टम बेहद सुस्त है। बाबा का कुआं क्षेत्र में अगर समय रहते कदम उठाए जाते, तो सैकड़ों दुर्लभ पेड़ों को बचाया जा सकता था। विभाग नुकसान का आकलन करने में जुटा है।