बारां में एसीबी टीम ने कृषि विस्तार विभाग के संयुक्त निदेशक आनंदीलाल मीणा को 8 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी को गुरुवार को एसीबी कोर्ट बारां में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। यह रिश्वत 2 डीलरों से स्टॉक रजिस्टर सत्यापित करने के एवज में ली गई थी। एसीबी डीएसपी प्रेमचंद मीणा ने बताया कि 4 मई को 2 खाद-बीज विक्रेताओं ने संयुक्त रूप से शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया कि संयुक्त निदेशक आनंदीलाल मीणा खाद, बीज और कीटनाशक के स्टॉक रजिस्टर सत्यापित करने के लिए प्रत्येक डीलर से 5-5 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे थे। कार्रवाई के दौरान आरोपी से 45 हजार की राशि भी मिली एसीबी ने शिकायत का गोपनीय सत्यापन करवाया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। सत्यापन के दौरान आरोपी ने एक परिवादी से 2 हजार रुपए पहले ही ले लिए थे और शेष राशि की मांग कर रहा था। इसके बाद बुधवार को एएसपी कालूराम वर्मा के नेतृत्व में टीम ने ट्रैप कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान आरोपी संयुक्त निदेशक को एक परिवादी से 5 हजार और दूसरे से 3 हजार रुपये सहित कुल 8 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से 45 हजार रुपए की संदिग्ध नकद राशि भी मिली। इनमें से 15 हजार रुपए टेबल की दराज से और 30 हजार रुपए बैग से बरामद हुए थे। इस राशि के संबंध में भी आरोपी से जांच जारी है। अगस्त में होने वाला था रिटायर आरोपी का मासिक वेतन करीब 2 लाख रुपए है। वह लगभग 4 महीने से कृषि विस्तार विभाग बारां में पदस्थ था। इससे पहले वह उद्यान विभाग में लंबे समय तक उप निदेशक के पद पर रह चुका है। पदोन्नति के बाद उसका तबादला कोटा हो गया था, लेकिन 4 महीने पहले उसे फिर से बारां में तैनात किया गया था। आरोपी अगस्त में सेवानिवृत्त होने वाला था। किराए के मकान और पैतृक घर पर भी की गई जांच डीएसपी ने बताया कि एसीबी टीम आरोपी के बारां स्थित किराए के मकान पर भी तलाशी ली गई। लेकिन यहां कोई संदिग्ध राशि आदि नहीं मिली है। वहीं, कोटा के कुन्हाड़ी स्थित मकान और बूंदी जिले के पैतृक घर पर भी जांच की गई। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से जिलेभर के डीलर स्टॉक रजिस्टर वेरिफिकेशन के लिए कार्यालय पहुंच रहे थे और उनसे कथित रूप से “एनुअल फीस” के नाम पर अवैध वसूली की जा रही थी। रिश्वत नहीं देने वाले डीलरों को वापस लौटा दिया जाता था। बताया जा रहा है कि रोजाना 30 से 50 डीलर वेरिफिकेशन के लिए पहुंच रहे थे। एक डीलर ने ऑनलाइन भुगतान की बात कही तो आरोपी से उसकी बहस भी हो गई थी और गुस्से में रजिस्टर फेंक दिया गया था।