बारां जिले में पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जानने के लिए जिला कलेक्टर ने 2 दिवसीय सघन सर्वेक्षण कराया। इस दौरान लगभग 5700 हैंडपंपों और सिंगल फेज नलकूपों की जांच की गई, जिसमें से करीब 650 हैंडपंप बंद पाए गए। सर्वेक्षण में सामने आया कि किशनगंज और शाहाबाद उपखंड में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां अधिकांश गांवों में जलापूर्ति हैंडपंपों पर ही निर्भर है। जलस्तर गिरने के कारण ये हैंडपंप सूख गए हैं। इन सूखे हैंडपंपों से प्रभावित 46 गांवों और 4 ढाणियों में तत्काल पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी गई है। इसके लिए 18 टैंकरों के माध्यम से रोज 109 ट्रिप पानी पहुंचाया जा रहा है। क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को ठीक करने के निर्देश जिला कलेक्टर बालमुकुंद असावा ने शहरी क्षेत्र में वार्ड संख्या 13 की डंडासोतियां बस्ती में नाला निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पाइपलाइन को तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए। उन्होंने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को सभी बंद पड़े हैंडपंपों को अभियान चलाकर युद्धस्तर पर ठीक करने और ग्रीष्मकालीन आकस्मिकता (समर कंटीजेंसी) के तहत कार्य करने के लिए भी पाबंद किया। टीमों ने 246 अस्पतालों का किया निरीक्षण स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर कलेक्टर के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में टीमों ने जिला अस्पताल से लेकर उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक कुल 246 चिकित्सा संस्थानों का सघन निरीक्षण किया। इस जांच का मुख्य उद्देश्य ग्रीष्मकाल में संभावित रोगों और लू-तापघात की स्थिति से निपटने के लिए सभी केंद्रों को पूरी तरह तैयार रखना था। निरीक्षण के दौरान पेयजल व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, स्टाफ की उपस्थिति और आपातकालीन सेवाओं की भी जांच की गई। सभी चिकित्सा प्रभारियों को ओआरएस फ्लूइड और जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने तथा 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।