बारां में कुएं में मिले बुजुर्ग के शव के मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने आरोपी नाती को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने 2 हजार रुपए नहीं देने पर नाना की हत्या कर शव कुएं में फेंक दिया था। पुलिस 100 अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल कर आरोपी तक पहुंची। मामला जिले के सारथल थाना इलाके का है। एसपी अभिषेक अंदासु ने बताया- 27 मार्च 2026 को सारथल निवासी भैरूलाल काछी ने मामला दर्ज कराया था। रिपोर्ट के अनुसार उनका बड़ा भाई बद्रीलाल (80) रोज की तरह 26 मार्च की रात को खेत पर बने शंकर भगवान के मंदिर के चबूतरे पर सोया था। अगली सुबह जब उनकी पत्नी चाय लेकर खेत पहुंचीं, तो बद्रीलाल का शव कुएं में पड़ा मिला। मृतक के सिर पर गंभीर चोट के निशान थे और उसके पैर बंधे हुए थे, जिससे हत्या की आशंका जताई गई। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी राजेश चौधरी के सुपरविजन में वृताधिकारी छबड़ा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जांच टीम ने साइबर सेल, एफएसएल और डॉग स्क्वायड की मदद ली। टीम ने आसपास के 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसी दौरान संदिग्ध रणजीत (25) निवासी झालावाड़ को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसने अपने नाना की हत्या करना कबूल कर लिया। फरार होने की फिराक में था आरोपी, पुलिस ने बस स्टैंड से दबोचा पुलिस ने आरोपी रणजीत को अकलेरा बस स्टैंड से गिरफ्तार किया, जहां वह फरार होने की फिराक में था। पूछताछ में सामने आया कि रणजीत ने 2000 रुपए के मामूली विवाद के चलते अपने नाना की बेरहमी से हत्या कर दी थी। सिर पर पत्थर से वार कर की हत्या पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी रणजीत ने अपने नाना से खर्च के लिए 2000 रुपए मांगे थे। पैसे नहीं देने पर उसने हत्या की साजिश रची। 26 मार्च की रात को नानी के खेत पर नहीं होने का फायदा उठाकर वह करीब 1 बजे खेत पहुंचा और सो रहे नाना के सिर पर पत्थर से वार कर हत्या कर दी। सुबह मौसी के घर जाकर सो गया आरोपी इसके बाद आरोपी ने शव को घसीटकर कुएं तक ले गया, पैर बांधकर पत्थर के साथ कुएं में फेंक दिया ताकि मामला दुर्घटना लगे। वारदात के बाद वह रातभर गायब रहा और सुबह मौसी के घर जाकर सो गया। बाद में शाम को वह सारथल से भागकर अकलेरा की ओर चला गया। पुलिस ने कुछ ही दिनों में किया मामले का खुलासा इस ब्लाइंड मर्डर का खुलासा करने में थाना सारथल, छीपाबड़ौद पुलिस, जिला विशेष टीम, साइबर सेल और एफएसएल टीम की अहम भूमिका रही। लगातार मॉनिटरिंग और तकनीकी जांच के चलते पुलिस ने महज कुछ ही दिनों में मामले का खुलासा कर दिया।