‘हमारे पूर्वजों ने बच्चों की पढ़ाई के लिए जमीनें दान देकर स्कूल बनवाए थे। लेकिन अब प्राइवेट कंपनी इन स्कूलों को तोड़ रही है। दूसरे स्कूलों में मर्ज करने के लिए सरकार को कह रही है। हमारी मांग है कि जहां हमें बसाया जाए, वहीं पर इन स्कूलों को भी शिफ्ट किया जाए।’ हाथ जोड़े कलेक्टर के सामने अपनी पीड़ा बताते ये बाड़मेर के जालीपा कपूरड़ी लिग्नाईट परियोजना से प्रभावित किसान हैं। किसानों ने बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर उनकी अवाप्त जमीन पर बने सरकारी स्कूलों को अन्य स्कूलों में मर्ज नहीं करने की गुहार लगाई। किसानों ने एडीएम को ज्ञापन देकर अपनी मांगे रखीं। आरोप तीन साल से किसी ने नहीं ली सुध किसानों का आरोप है कि कंपनी के आगे प्रशासन मौन है। तीन साल हो गए, लेकिन हमारी किसी ने सुध नहीं ली। हमने आज एडीएम को ज्ञापन दिया है। उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि कंपनी से बात कर किसानों की भावना के अनुसार फैसला करेंगे। किसानों ने बताया कि जेएसडब्ल्यू कंपनी ने साल 2011 में ही किसानों की जमीन अवाप्ति का पैसा जारी कर दिया था। लेकिन 15 साल बाद भी स्कूलों की शिफ्टिंग को लेकर प्रशासन की कोई प्लानिंग नहीं है। स्कूल भवन तोड़ने पहुंचे कंपनी ठेकेदार वीरमनगर निवासी जालाराम बेनीवाल ने बताया- जालीपा कपूरड़ी माइंस परियोजना से प्रभावित तीन गांव चक धोलका, वीरमनगर और लाखेटाली में सरकारी स्कूल हैं। हमारी मांग है कि जब तक सरकार स्कूल को मर्ज न कर दे या कहीं और शिफ्ट न कर दे उन्हें न छेड़ा जाए। किसानों का कहना है कि कंपनी ने अवाप्त जमीनों पर बने स्कूलों को तोड़ने के लिए टेंडर भी जारी कर दिया है। कंपनी की प्रतिनिधी खुद सामने नहीं आती हैं, जिससे हम उनसे बात कर सकें। करीब 1000 बच्चे होंगे प्रभावित अवाप्त की गई जमीनों पर वर्तमान में चार सरकारी स्कूल चल रहे हैं। चारों स्कूलों में करीब 1000 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें सबसे बड़ा स्कूल चक धोलका में है जो 12वीं कक्षा तक है। मालाणी डूडियों की ढाणी, माधल की ढाणी, बेनीवालों की ढाणी में प्राइमरी स्कूलें है। किसानों ने इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य का ध्यान रखते हुए आबादी के पास शिफ्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि अन्य स्कूलों में मर्ज करने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।