NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान 26 जुलाई शाम 6 बजे तक स्टूडेंट्स पर दर्ज सभी केसों को सम्राट सरकार वापस लेगी। सभी गिरफ्तार युवकों को तुरंत रिहा किया जाएगा। यह ऐलान सरकार ने 27 जुलाई की देर शाम 8 बजे किया। 40 से ज्यादा FIR, 355 युवकों को जेल भेजने वाली सम्राट सरकार ने फैसला क्यों पलटा, जानेंगे, बूझे की नाही में…। सरकार के फैसला पलटने के 4 बड़े कारण 1. समझौता टूट रहा है, फैसला बदलना होगा 25 जुलाई की शाम 3.50 बजे दिल्ली में केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच बैठक हुई। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने CJP प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका से बातचीत की। शाम 5:20 बजे सरकार और CJP ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें CJP ने ऐलान किया कि सरकार ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं। दिल्ली और देशभर में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR रद्द की जाएंगी। प्रदर्शन के लिए भविष्य में भी किसी पर कार्रवाई नहीं होगी। मोदी सरकार के इस समझौते के बावजूद सम्राट सरकार का प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स पर एक्शन जारी था। 25 जुलाई तक बिहार पुलिस ने 40 से ज्यादा FIR की। 355 लोगों को गिरफ्तार कर राज्य के अलग-अलग जेलों में रखा। पटना जिला प्रशासन ने कुछ अखबारों में 167 युवकों की फोटो पब्लिश कराई। उन्हें असामाजिक तत्व बताया और लोगों से सूचना देने की अपील की। 2. AK-47 की फायरिंग ने देशभर में कराई किरकिरी 25 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान सीवान में DIU कांस्टेबल का स्टूडेंट्स पर AK-47 से गोली चलाने का वीडियो सामने आया। इस घटना पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कड़े एतराज जताए। 27 जुलाई को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने X पर लिखा… इसके अलावा देशभर में बिहार पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना सोशल मीडिया पर हुई। इसके बाद 27 जुलाई को सीवान के DM विवेक रंजन मैत्रेय और SP पूरन कुमार झा ने बताया कि कांस्टेबल अभिषेक पटेल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। DM ने स्पष्ट तौर पर कहा कि फायरिंग पूरी तरह से अनधिकृत (बिना आदेश के) थी और आम जनता या भीड़ को नियंत्रित करने के नियमों के खिलाफ थी। सिपाही ने बिना किसी आदेश के कार्रवाई की और सार्वजनिक सभा/भीड़ में उसे असॉल्ट राइफल लेकर नहीं जाना चाहिए था और न ही गोली चलानी चाहिए थी। 3. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले सरकार ने वापस लिया फैसला देशभर में छात्रों के खिलाफ पुलिस की बलपूर्वक कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सीवान में छात्रों पर AK-47 से हुई फायरिंग के खिलाफ RJD सांसद मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। इस पर 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। SC ने कहा कि सिर्फ आंदोलन होने के आधार पर लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पुलिस की अंधाधुंध या अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। स्टूडेंट्स पर पुलिसिया कार्रवाई के मामले की सुनवाई आज यानी 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है। बताया जा रहा है कि कोर्ट में किरकिरी होने के खतरे को भांपते हुए सम्राट सरकार ने अपने फैसले को पलट दिया। 4. जंतर-मंतर जैसा पटना का हाल करने की धमकी सरकार की ताबड़तोड़ कार्रवाई पर विपक्ष और छात्र संगठन भड़क गए। तेजस्वी यादव ने सीधे चेतावनी देते हुए कहा- ‘अगर सरकार ने अपने समझौतों पर अमल नहीं किया और प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स पर केस वापस नहीं लिया तो राज्य में बड़ा आंदोलन होगा।’ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की एक चेहरा रहीं और आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा 27 जुलाई को पटना पहुंचीं। उन्होंने जेल में बंद सभी गिरफ्तार साथियों और छात्र नेताओं से मुलाकात की। उसके बाद नेहा ने कहा... वहीं, 27 जुलाई की शाम CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा... 27 जुलाई को पटना में 14 छात्र संगठनों ने बैठक की। इसमें सरकार के एक्शन के खिलाफ 29 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरना देने का ऐलान किया गया। साथ ही 30 जुलाई को बिहार बंद का ऐलान हुआ। पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल कहते हैं, ‘छात्र संगठनों के एक्टिव होने के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई। अभी सरकार युवाओं के नए आंदोलन को नहीं झेलना चाहती। यही कारण है कि सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा।’