चित्तौड़गढ़ में 1 मई को शाम 5 बजे से वन्यजीव गणना शुरू हो रही है, जो बस्सी और सीतामाता सेंचुरी में की जाएगी। पिछले साल यानी 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो कई जगह वन्यजीवों की संख्या में कमी देखने को मिली है, हालांकि कुछ नए पक्षी भी दिखाई दिए हैं। सीतामाता सेंचुरी की पहचान मानी जाने वाली उड़न गिलहरी की संख्या 2024 में 100 थी, जो 2025 में घटकर 85 रह गई। वहीं लेपर्ड की संख्या दोनों सेंचुरी में अलग-अलग ट्रेंड दिखा रही है, बस्सी में कमी आई है जबकि सीतामाता में बढ़ोतरी हुई है। कुल वन्यजीवों की बात करें तो बस्सी सेंचुरी में 2024 में 3667 वन्यजीव थे, जो 2025 में 6 घटकर 3661 रह गए। इसी तरह सीतामाता सेंचुरी में 2024 में 13063 वन्यजीव थे, जो 2025 में 182 घटकर 12881 रह गए। हालांकि वन विभाग को उम्मीद है कि इस बार पूरे साल की मेहनत के बाद संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। दुर्ग स्थित मृगवन में वन्यजीवों की स्थिति दुर्ग स्थित मृगवन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 में यहां जंगली बिल्ली 1, नेवला 10, चीतल 34, सांभर 15, लंगूर 268, ईगल्स 7 और अजगर 2 थे। वहीं 2025 में जंगली बिल्ली 1, शीतल 35, सांभर 15, लंगूर 207 और अजगर 2 दर्ज किए गए। खास बात यह रही कि 2025 में यहां एक लेपर्ड भी देखने को मिला, जो पहले नहीं था। हालांकि ईगल्स और नेवला पूरी तरह से गायब हो गए, जो चिंता का विषय है। बस्सी और सीतामाता में मांसाहारी वन्यजीवों की तुलना मांसाहारी वन्यजीवों की बात करें तो बस्सी सेंचुरी में 2024 में लेपर्ड 16, गीदड़ 133, जरख 35, जंगली बिल्ली 32, बिल्ली 22, लोमड़ी 42, छोटा बिज्जू 21, कबर बिज्जू 9, सिवेट कैट 5, छोटा सीवेट 17, नेवला 35 और काली मूछ वाला नेवला 29 थे। वहीं 2025 में लेपर्ड 13, गीदड़ 117, जरख 28, जंगली बिल्ली 32, बिल्ली 16, लोमड़ी 36, छोटा बिज्जू 21, कबर बिज्जू 7, सिवेट कैट 6, नेवला 35 और काली पूछ वाला नेवला 34 हो गए। दूसरी ओर सीतामाता सेंचुरी में 2024 में लेपर्ड 57, गीदड़ 541, जरख 140, जंगली बिल्ली 191, बिल्ली 6, लोमड़ी 154, छोटा बिज्जू 160, कबर बिज्जू 45, बड़ा बिज्जू 23, नेवला 227, छोटा नेवला 20, काली मूछ वाला नेवला 218 और पैंगोलिन 60 थे। वहीं 2025 में लेपर्ड बढ़कर 69 हो गए, लेकिन गीदड़ 529, जरख 136, जंगली बिल्ली 170, बिल्ली 86, लोमड़ी 111, छोटा बिज्जू 161, कबर बिज्जू 28, बड़ा बिज्जू 43, नेवला 353, छोटा नेवला 7, काली पूछ वाला नेवला 57 और पैंगोलिन 51 दर्ज किए गए। शाकाहारी वन्यजीवों में उतार-चढ़ाव बस्सी सेंचुरी में शाकाहारी वन्यजीवों की बात करें तो 2024 में चीतल 27, सांभर 1, नीलगाय 651, चेसिंगा 8, चिंकारा 83, जंगली सूअर 589, सेही 42 लंगूर, 1225 खरगोश 80 थे। वहीं 2025 में चीतल 25, नीलगाय 593, चौसिंगा 4, चिंकारा 112, जंगली सूअर 595, सेही 34 लंगूर, 1335 खरगोश 52 दर्ज किए गए। सीतामाता सेंचुरी में 2024 में चीतल 3, सांभर 28, नीलगाय 1346, चेसिंगा 364, जंगली सूअर 988, सेही 104 लंगूर 4135 और उड़न गिलहरी 100 थी। वहीं 2025 में नीलगाय 1263, सांभर 40, चौसिंगा 457, जंगली सूअर 742, सेही 140 लंगूर 3913, खरगोश 276 और उड़न गिलहरी 85 रह गई। पक्षियों और अन्य जीवों में नए बदलाव पक्षियों और अन्य जीवों की बात करें तो बस्सी सेंचुरी में 2024 में सारस 38, वल्चर 4, जंगली मुर्गा 31, जंगली उल्लू, हनी बजर्ड 7, शिकारी पक्षी 27, मोर 329, तीतर 50, मगरमच्छ 53 और पाटा गोह 20 थे। वहीं 2025 में सारस 20, जंगली उल्लू 8, हनी बजर्ड 8, बाज 29, मोर 352, तितर 59, जंगली कछुआ 1, मगरमच्छ 65, पाटा गोह 9, रेड हेडेड वल्चर 29, यूरेशियन ईगल ओवल 4, झपटा रेडस्पर फाउल 5 और चमगादड़ 6 दर्ज किए गए। सीतामाता सेंचुरी में 2024 में सारस 6, गिद्ध 2, जंगली मुर्गा 1946, शिकारी पक्षी 63, बाज 85, मोर 1026, तीतर 399, जंगली कछुआ 41, पाटा गोह 127 और स्पॉटेड ओवल 99 थे। वहीं 2025 में गिद्ध 3, जंगली मुर्गा 1902, जंगली उल्लू 136, बाज 14, मोर 965, तितर 754, जंगली कछुआ 57, मगरमच्छ 3, पाटा गोह 83, रेड हेडेड वल्चर 14, यूरेशियन ईगल ओवल 27, हेरियल 141 और चमगादड़ 37 दर्ज किए गए। दोनों सेंचुरी में बड़ा बदलाव: कई प्रजातियां गायब, कई नई एंट्री दर्ज बस्सी और सीतामाता सेंचुरी के 2024 और 2025 के आंकड़ों की तुलना करें तो मांसाहारी, शाकाहारी और पक्षियों में कई बदलाव साफ नजर आते हैं। मांसाहारी श्रेणी में बस्सी सेंचुरी से छोटा सीवेट 2025 में पूरी तरह गायब हो गया, जबकि सीतामाता सेंचुरी में ऐसा कोई मांसाहारी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ, हालांकि कई की संख्या घटी है। शाकाहारी जानवरों में बस्सी सेंचुरी से सांभर (1) 2024 में था लेकिन 2025 में पूरी तरह गायब हो गया, जबकि सीतामाता सेंचुरी में कोई शाकाहारी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, लेकिन उड़न गिलहरी 100 से घटकर 85 रह गई। अब पक्षियों और अन्य जीवों की बात करें तो बस्सी सेंचुरी में 2024 में मौजूद वल्चर, जंगली मुर्गा और शिकारी पक्षी 2025 में पूरी तरह गायब हो गए, जबकि 2025 में यहां बाज, जंगली कछुआ, रेड हेडेड वल्चर, यूरेशियन ईगल ओवल, झपटा रेडस्पर फाउल और चमगादड़ नए रूप में दर्ज हुए। इसी तरह सीतामाता सेंचुरी में 2024 में मौजूद सारस, शिकारी पक्षी और स्पॉटेड ओवल 2025 में पूरी तरह गायब हो गए, जबकि 2025 में यहां जंगली उल्लू, मगरमच्छ, रेड हेडेड वल्चर, यूरेशियन ईगल ओवल, हेरियल और चमगादड़ नए रूप में सामने आए।