झुंझुनूं का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल भगवानदास खेतान (BDK) में लोगों को हेल्प डेस्क की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक ओर यहां हाईटेक मशीनें और विशेषज्ञ डॉक्टरों की लंबी फेहरिस्त है। दूसरी तरफ हेल्प डेस्क की कमी नजर आती है। अस्पताल में आए मरीजों का कहना है कि अस्पताल भूलभुलैया से कम नहीं है। हमें आखिर पता तो चले कि जाना कहां है। रोजाना 2500 से 3000 से ज्यादा की ओपीडी वाले इस अस्पताल में ग्रामीण अंचलों से आने वाले बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोग हाथ में पर्ची थामे एक इधर से उधर भटकते नजर आते हैं। फिलहाल अस्पताल परिसर में नई बिल्डिंग का अलग काम चल रहा है। अस्पताल में घुसते ही मरीज को यह समझ नहीं आता कि उसे पर्ची कहां कटवानी है, डॉक्टर कहां मिलेगा और जांच के लिए किधर जाना है। अस्पताल में इलाज करवाने आए सुरेश कुमार ने बताया कि बीडीके अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ 'मैनेजमेंट' और 'संवाद' की। मरीज को यह नहीं पता होगा कि उसे जाना कहां है, तो मशीनों और डॉक्टरों तक पहुंचेगा कैसे? अकेले आए बुजुर्गों को व्हीलचेयर और स्ट्रेचर की तत्काल जानकारी मिल सके। एक्स-रे, सोनोग्राफी और लैब का रास्ता ढूंढने में होने वाली परेशानी खत्म हो।