नमस्कार, विधायकजी ने जोधपुर में खरी बात कह दी। बोले- पिताजी ने जूते मारे तो मैं MLA बन गया। जयपुर में टूटी सड़क का विरोध कर रहे बुजुर्ग ने JDC के पुतले पर लट्ठ बरसा दिए। हनुमानगढ़ में भजन गायिका को श्रोताओं पर गुस्सा आ गया और सिक्किम के राज्यपाल महोदय का मरुधरा प्रेम सामने आ गया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. पिताजी 5 जूते मारते तो मैं MP बन जाता बच्चे पर मास्टरजी धौंस जमा दें तो आजकल बखेड़ा खड़ा हो जाता है। कई माता-पिता भी बच्चे को लाड़ में बिगाड़ देते हैं। ऐसे में ओसियां (जोधपुर) विधायकजी ने सीख की बड़ी बात हास्य के अंदाज में कह दी। विधायक भैराराम सियोल एक कार्यक्रम में शामिल होने जोधपुर शहर पहुंचे थे। बात परवरिश और अनुशासन की चली। विधायकजी ने अनुभव साझा किया- एक दिन पिताजी को बढ़िया गुस्सा आया और उन्होंने मेरे अच्छी तरह तीन जूते मारे। एक जूते का वजन 800 ग्राम। पिताजी ने तीन जूते मारे तो मैं MLA बन गया, पांच मारते तो MP बन जाता। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे हास्य और सीख दोनों के रूप में लिया। सियोल ने बताया- मेरा संदेश साफ था। आज की पीढ़ी अपने माता-पिता का सम्मान करें। उनके मार्गदर्शन को स्वीकार करे। माता-पिता की डांट-फटकार में भी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की चिंता छुपी होती है। बात बिल्कुल खरी। उन्होंने कहा- मेरे पिता की सख्ती के कारण ही मुझमें अनुशासन आया और अनुशासन ही व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। 2. जयपुर में JDC का विरोध, बोले- हे प्राणों के लेवा जयपुर में नेशनल हाईवे-52 पर एक गांव जाहोता में गांव वाले धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि हाईवे से रामपुरा-डाबड़ी होते हुए जो सड़क जाहोता तक जाती है, वह खस्ताहाल है। सड़क की हालत बेहद खराब। जगह-जगह गड्ढे। दुपहिया लेकर जाते हैं तो दचकों से हालत खराब। हादसे भी होते रहते हैं। सड़क की हालत के लिए लोगों ने जयपुर विकास प्राधिकरण के JDC सिद्धार्थ महाजन को जिम्मेदार ठहराया। जेडीसी का पुतला बनाकर लिखा- जयपुर विनाश प्राधिकरण। एक बाबाजी ने भारत माता की जय बोलते हुए पुतले पर लट्ठ जमा दिए। साथ ही पुतले को भजन भी सुना दिया- हे जेडीसी देवा। आप करो हमारी सेवा। हे प्राणों के लेवा। अब प्रभु प्राण ही लोगे क्या? सड़क की मांग करते हुए जाहोता के श्याम प्रताप राठौड़ अनशन पर हैं। उनकी तबीयत बिगड़ी तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शन में रोडवेज बस के ड्राइवर भी शामिल। बोले- इस रोड पर आते ही गाड़ी की हालत खराब हो जाती है। 3. गुस्सा होकर गायिका ने ढंग से सुनाए ‘भजन’ हनुमानगढ़ के भादरा में बालाजी का भजन चल रहा था। भजन गायिका ने बालाजी के भजन सुनाए तो श्रोता झूम उठे। भजनों का सिलसिला आगे बढ़ा और गायिका ने तेजाजी महाराज के भजन का आलाप लिया। इस बीच एक श्रोता उठा और भजन में खलल डाल दी। उसने तर्क दिया कि बालाजी का जागरण है तेजाजी का भजन क्यों? यह सुनकर गायिका उस श्रोता पर भड़क उठी। असली भजन उसने उस श्रोता को सुनाए। बोलीं- तेजाजी महाराज राजस्थान के लोक देवता हैं। उनके लिए अनुचित भाषा बर्दाश्त नहीं करूंगी। गायिका के तेवर देख श्रोता भी सहम गया। आयोजक चारों ओर जुट गए। आस्था की जीत हुई। गुस्से में गायिका ने जो कुछ कहा उसी पर पंडाल तालियों से गूंज उठा। 4. चलते-चलते.. आदमी अपनी मिट्टी से कितना ही दूर चला जाए। अपने घर, अपने गांव, अपने शहर और अपने क्षेत्र की यादें उसके दिल में बसती हैं। सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुरजी का भी यही हाल है। राजस्थान से 1600 किलोमीटर दूर हैं, लेकिन दिल में मरुधरा के गीत। राजस्थान दिवस को लेकर सिक्किम के लोकभवन में एक कार्यक्रम हुआ था। कार्यक्रम में माथुर साहब ने मंच से मरुधरा का गीत सुनाया। बोल थे- ऊंची धोती और अंगरखी, साधो-सादो वेश। हीरां और पन्नां सूं जड्यो, म्हारो मरुधर देश इनपुट सहयोग- जेठमल जैन (तिंवरी, जोधपुर), मनोज सैनी (चौमूं, जयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..