कांग्रेस की पूर्व मंत्री और SC की चेयरपर्सन ममता भूपेश आज भरतपुर पहुंची। उन्होंने महिला आरक्षण बिल पर कहा कि साल 2023 महिला आरक्षण कानून का नाम बदलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति बंधन अधिनियम दिया और उसे लोकसभा में पास करवा दिया गया था। उसके बाद फिर से इस बिल को नए तरीके से पेश करने का प्रयास किया गया। जबकि कांग्रेस ने महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। कांग्रेस में प्रमुख पदों पर रहीं महिलाएं कांग्रेस में SC विभाग की चेयरपर्सन ममता भूपेश ने महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। कांग्रेस ने महिलाओं को नगर निगम और पंचायती राज संस्थाओं में स्थान दिया था। यह राजीव गांधी और कांग्रेस की सोच थी। कांग्रेस ने अनेक नेता प्रमुख पदों के ऊपर दिए हैं। चाहे इंदिरा गांधी हो या प्रतिभा पाटिल हों। कांग्रेस ने महिलाओं को हमेशा अग्रिम भूमिका देने का प्रयास किया है। साल 2023 में बिल लोकसभा में किया गया था पास साल 2010 में UPA की सरकार थी। देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे। उस दौरान भी महिला आरक्षण का बिल पास करवाया गया था लेकिन, लोकसभा में पास नहीं हो पाया था। साल 2023 में महिला आरक्षण कानून जिसे नारी शक्ति बंधन अधिनियम का नाम नरेंद्र मोदी ने दिया था। 2023 में यह बिल लोकसभा के अंदर पास करवाया था। यह एक कानून बन गया था। वर्तमान सीटों में ही महिलाओं का आरक्षण किया जाएगा। फिर से बिल पेश करने का किया गया प्रयास आज नए तौर पर इस बिल को पेश किया गया। साल 2023 में सोनिया गांधी ने इस बिल का समर्थन किया था। 16 अप्रैल को अचानक नोटिफिकेशन के माध्यम से आनन फानन में सत्र बुलाया गया। इस सत्र में इस बिल को नए तरीके से पेश करने का प्रयास किया गया। जिसमें OBC की महिलाओं का जिक्र नहीं है।