राजस्थान ड्रग विभाग ने भरतपुर में करीब दो महीने पहले एक एंटीबायोटिक दवाई के सैंपल लिए थे। इस सैंपल की जांच रिपोर्ट शुक्रवार को आई तो पता चला ये दवाई पूरी तरह फेल है। ऐसे में राजस्थान ड्रग विभाग ने शुक्रवार को प्रदेश में बड़ी कार्रवाई की। विभाग ने जयपुर, जालोर और भरतपुर में दवाई विक्रेताओं के यहां छापा मारा। वहां से सैंपल लिए गए। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया- करीब 2 माह पहले भरतपुर स्थित इंडियन मेडिकल एजेंसी से क्यूसी पॉट-200 टैबलेट (सेफपोडोक्साइम प्रॉक्सेटिल) एंटीबायोटिक दवाई का सैंपल लिया था। इसकी रिपोर्ट सामने आई तो पता चला कि ये दवाई पूरी तरह फेल है। दवा निर्माता कंपनी हिमाचल प्रदेश के बद्दी जिला सोलन की मैसर्स VADSP फर्मास्यूटिकल है। इस कंपनी ने दवाई की सप्लाई जयपुर की फर्म मैसर्स Iqumed Healthcare को की थी। इस पर ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट से 4-5 लोगों की टीम ने जयपुर स्थित फर्म के यहां छापा मारा और वहां से 4 लाख रुपए कीमत की ये दवाई जब्त की। अलग-अलग बैच के लिए 4 नमूने भरतपुर से एंटीबायोटिक दवाई के सैंपल जांच में फेल होने के बाद विभाग की दो टीमों ने जयपुर, जालोर में अलग-अलग दवा स्टोर पर छापा मारा। इस दौरान करीब 4 लाख रुपए कीमत की दवाईयां जब्त करते हुए उनके सैंपल लेकर जांच के लिए भिजवाए हैं। वहीं टीम ने इस दवाई के अलग-अलग बैच के 4 नमूने भी लिए हैं, जिनको जांच के लिए लैब भिजवाया है। वहीं दो अलग-अलग टीमें भरतपुर और जालोर गई, जहां इन दवाईयों की सप्लाई की गई। इन दोनों जिलों में भी 4 दवाई विक्रेताओं के यहां छापा मारकर स्टॉक बरामद किया और सैंपल लिए। जबकि एक टीम को हिमाचल और उत्तराखंड भेजने का फैसला लिया है। 60 दिन बाद आई जांच रिपोर्ट, बिक गए कई दवाईयों के बैच भरतपुर स्थित जिस मेडिकल एजेंसी से सैंपल लिए, उसकी रिपोर्ट करीब 60 दिन बाद सामने आई। लेकिन उससे पहले कंपनी इस बैच की दवाई के कई पैकेट्स बाजार में बेच चुकी थी। इसके अलावा दूसरे बैच की दवाईयां भी सप्लाई हो चुकी हैं। ऐसे में ड्रग डिपार्टमेंट की कार्रवाई पर भी सवाल उठता है कि आखिरी इतनी देरी से रिपोर्ट क्यों आई? 500 से ज्यादा दवाएं बनाती है कंपनी ड्रग डिपार्टमेंट के अधिकारियों की मानें तो ये कंपनी इस एंटीबायोटिक के अलावा अन्य 500 तरह की दवाईयां बनाती हैं। ऐसे में अब आशंका है कि कंपनी की अन्य दवाओं में भी इसी तरह की अनियमितताएं हो सकती हैं।